डेस्क : पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Govt) ने मतदाता सूची में अनियमितताओं के मामले में कड़ी कार्रवाई की है. पांच अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है. दो पश्चिम बंगाल सिविल सेवा अधिकारियों समेत कुल चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. इसके साथ ही, संविदा पर कार्यरत एक डाटा एंट्री ऑपरेटर (Data Entry Operator Suspended) को भी निलंबित कर दिया गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ मामला ज्यादा गंभीर माना गया है. न केवल निलंबन बल्कि उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है. हालांकि, बाकी अधिकारियों के खिलाफ अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई चुनाव आयोग (Election Commission) के निर्देश पर की गई है. दरअसल, हाल ही में राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत ने दिल्ली में आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की थी. इस बैठक में मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया था कि आज ही अनियमितता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. राज्य सरकार ने इसी वादे के तहत कार्रवाई की है.
चुनाव आयोग लंबे समय से यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि मतदाता सूची (Voter List) पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी हो. यही वजह है कि अब छोटी-मोटी गड़बड़ियों पर भी सख्ती बरती जा रही है. माना जा रहा है कि आगे की जांच में और नाम सामने आ सकते हैं और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है.
फिलहाल, राज्य सचिवालय नवान्न (State Secretariat Navanna) से मिली जानकारी के अनुसार, निलंबित अधिकारियों को विभागीय जांच का सामना करना पड़ेगा. साथ ही, डाटा एंट्री ऑपरेटर को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा. यह मामला राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि चुनावी साल में विपक्ष लगातार मतदाता सूची से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी पर सवाल उठा रहा है.
