डेस्क :दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जन सुनवाई के दौरान हुआ हमला केवल एक व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्कृति के लिए गहरी चिंता का विषय है। जन सुनवाई नागरिकों और सत्ता के बीच संवाद का वह सेतु है, जो शिकायत और समाधान के बीच की दूरी को कम करता है। यदि इसी मंच पर असंतोष हिंसा का रूप ले ले, तो यह न केवल कानून-व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि नागरिक शिष्टाचार पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है यह सच है कि लोकतंत्र में आलोचना और विरोध का अधिकार हर नागरिक को है। परंतु असहमति की भाषा हिंसा नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री पर हमला करना सिर्फ़ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि उस संवैधानिक पद का भी अपमान है जो जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। राजनीतिक दृष्टि से यह घटना विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के लिए विमर्श का मुद्दा बन सकती है, पर असली सवाल सुरक्षा और शुचिता का है। सवाल उठता है कि यदि दिल्ली की मुख्यमंत्री अपने आधिकारिक आवास में सुरक्षित नहीं हैं, तो साधारण नागरिक की सुरक्षा पर कैसे भरोसा किया जा सकता है
