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कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मनाई गई तुलसीदास जयंती

 श्रीरामचरितमानस के श्लोकों एवं सुंदरकांड का हुआ पाठ

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ, कलारंजनी मंच तथा राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्नातकोत्तर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के उपलक्ष्य में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हाल में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दोपहर 2:00 बजे तुलसीदास जी एवं श्रीराम, लक्ष्मण तथा सीता जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ।

उद्घाटन भाषण में कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय जी ने श्रीरामचरितमानस के प्रत्येक कांड के आरंभ में निहित संस्कृत श्लोकों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रमों में श्लोकपाठ अनिवार्यतः होना चाहिए। उन्होंने आयोजन की सराहना की।

कलारंजनी मंच के अध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि यद्यपि संस्कृत में आदिकाव्य वाल्मीकि रामायण सर्वप्रथम रचित हुआ, तथापि जनसामान्य तक रामकथा को पहुँचाने का श्रेय तुलसीदास जी को जाता है।

इसके उपरांत श्रीरामचरितमानस के बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड एवं उत्तरकांड के प्रारंभिक संस्कृत श्लोकों एवं कुछ अन्य महत्वपूर्ण श्लोकों का सामूहिक वाचन किया गया।

तत्पश्चात सुंदरकांड का समवेत पाठ हुआ, और कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ। ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. कुणाल कुमार झा ने हनुमान चालीसा की रचना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह रचना तुलसीदास जी ने कारावास में रहते हुए की थी। राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर कुमार झा ने सभी स्वयं सेवकों को माय भारत पोर्टल में पंजीकरण तथा CNA खाता चलाने के लिए दिशा निर्देश दिए।

कार्यक्रम का संचालन कलारंजनी मंच की संयोजक तथा एनएसएस स्नातकोत्तर इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. साधना शर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कलारंजनी मंच के सह-संयोजक डॉ. रितेश कुमार चतुर्वेदी ने किया।

विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकांत के अनुसार व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो. दयानाथ झा, विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. पु रेन्द्र बारिक, ज्योतिष विभाग से डॉ. राम निहोरा रॉय, डॉ. वरुण कुमार झा, दर्शन विभागाध्यक्ष डॉ. धीरज कुमार पांडेय, डॉ. शंभु शरण तिवारी, डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ. एल. सविता आर्य, वेद विभाग से डॉ. देवहुती, डॉ. संतोष कुमार तिवारी, मअ रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. मुकेश कुमार निराला एवं डॉ. माया योग प्रशिक्षिका व शोधछात्रा उपासना सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, स्वयं सेवक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। छात्रों में विश्वमोहन झा, नेहा, रचना, सचिन, देवेश, अंकित आदि सहित कुल 50 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

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