एग्रोइकोलॉजी और पेस्ट मैनेजमेंट पर विद्वानों ने दिए व्याख्यान
दरभंगा (नासिर हुसैन)। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभाग द्वारा दो – दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन शुक्रवार को कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में हुई। ‘ एग्रोइकोलॉजी और पेस्ट मैनेजमेंट पर पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य का संतुलन’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में संबद्ध विषय के विद्वान और प्रबुद्ध प्रोफेसरों ने व्याख्यान दिए।
उद्घाटन और तकनीकी सत्र में कृषि पारिस्थितिकी, अभ्यास और उनके लाभ,एकीकृत कीट प्रबंधन में नवाचार, बायोटेक्नोलॉजिकल नियंत्रण, सतत कीट नियंत्रण उपाय जैव विविधता संरक्षण,कीटनाशकों के कारण कैंसर के विकास आदि पर विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन के आयोजन समिति में डॉ. आरती कुमारी अध्यक्ष, डॉ. कुमार मनीष संयोजक, डॉ. संजीव कुमार आयोजन सचिव के रूप में शामिल थे। सम्मेलन में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. वी.वी. राममूर्ति, प्रमुख वैज्ञानिक, आईएआरआई, नई दिल्ली और डॉ. नवीन कुमार, एम्स दिल्ली के द्वारा मुख्य वक्तव्य दिए गए।
तदुपरांत डॉ. इंद्रकांत सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ. आलोक चंद्र भारती, दिल्ली विश्वविद्यालय और डॉ. एस. एजिल वेडेन, सीएफटीआरआई, मैसूर से आमंत्रित विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। सम्मेलन की कड़ी में शोधकर्ताओं और छात्रों द्वारा विविध विषयों पर मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियाँ दी गईं। पैनल द्वारा चर्चा और विषय मंथन इस आयोजन की मुख्य विशेषता रही। इस सम्मेलन में प्रोफेसर दिलीप कुमार चौधरी, संरक्षक और विज्ञान संकाय के डीन ने विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक और शोध गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. दिव्या रानी हांसदा, सह-संरक्षक, रजिस्ट्रार ने कृषि पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य विज्ञान के विभिन्न पहलुओं और इन क्षेत्रों में शोध की आवश्यकता पर चर्चा की। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संजय पासवान,
एमएलसी,बिहार और विशिष्ट अतिथि के रूप में नंद किशोर, आईएफएस और डॉ. तपन शांडिल्य उपस्थित थे। शाम को विभाग के छात्रों और शोधार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम में मिथिला की लोक संस्कृति व संगीत, शास्त्रीय नृत्य और गायन शामिल रहें । बता दें, अंतिम तकनीकी – सत्र और समापन समारोह आज शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबली हॉल में आयोजित किया जाएगा। सत्र का कुशल संचालन विभागीय शिक्षिका डॉ. पारुल बनर्जी ने किया। इस सम्मेलन में कई विश्वविद्यालयों के संकाय सदस्य, शोधार्थी और छात्र – छात्राएं उपस्थित रहें।
