साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ज चतुरी चाचा अपने प्रपंच चबूतरे पर मुंशीजी व कासिम चचा के संग बड़े प्रफुल्लित बैठे थे। मेरे पहुंचते ही चहक पड़े। चतुरी चाचा बोले- रिपोर्टर, आज मौसम बहुत बढ़िया है। सुबह ही धूप खिल गयी। अब ऐसा ही मौसम रहे। कोहरा और पाला न पड़े। वरना, आलू, मटर, सरसों व अरहर की फसल को बड़ा नुकसान होगा। दूसरे, इससे लोगों को ठंड से निजात मिलेगी। लोग नया साल भी अच्छे से मना सकेंगे। वैसे कोरोना संकट को देखते हुए नए साल की पार्टियां न करना ही उचित होगा।
तभी ककुवा व बड़के दद्दा भी चबूतरे पर पधार गए। पिछले हफ्ते ककुवा प्रपंच में शामिल नहीं हो सके थे। क्योंकि, उनको सर्दी लग गयी थी। आज वह खूब स्वस्थ, मस्त नजर आ रहे थे। चबूतरे पर बैठते ही ककुवा शुरू हो गए। वह बोले- चतुरी भइय्या, नई पीढ़ी क्यार हालु द्याखव। क्रिसमस केरे आगे गीता जयंती अउर तुलसी जयंती भूलिनगे। यही चक्कर मा पच्चीस तारीक का अटलजी अउ मालवीयजी क्यार जलमदिन फीका रहा। रोज कौनव न कौनव डे मनावय वाली यह पीढ़ी अपन कैलेंडर तलक भूलि गई। सब ससुरे अंग्रेजी साल मनावत हयँ। आजु केरे लरिका बिटियन क हिन्दी महीनन ते कौनव मतलब नाय हय। इनका सबका को बताव कि चैत से अपन नवा साल शुरू होत हय। फागुन मा खत्म होत हय। तीस दिसम्बर का अगहन खत्म होई। इकतीस तारीक ते पूस लागि जाई।
चतुरी चाचा ने ककुवा की बात पर मोहर लगाते हुए कहा- ककुवा, सही कह रहे हो। अंग्रेजी सब बंटाधार किहे हय। अंग्रेजी भाषा सबका आवे का चही। सबका सीखय का अउ पढ़य का चही। काहे ते अंग्रेजी दुनिया केरी सम्पर्क भाषा बनि हय। हम सब जनेका अंग्रेजियत ते दुरि रहय चही। अंग्रेजी संस्कृति केरे बजाय भारतीय संस्कृति अपनावे का चही। इसी बीच चंदू बिटिया आग में भुनी शकरकंद, धनिया की चटपटी चटनी, गुनगुना नींबू पानी और गिलोय का काढ़ा लेकर आ गई। हम सबने शकरकंद खाकर पानी पीया। फिर गिलोय काढ़े के साथ प्रपंच शुरू हुआ।
कासिम चचा बोले- किसान आंदोलन को 29 दिन हो चुके हैं। मोदी सरकार किसानों की मांग पर ध्यान नहीं दे रही है। इतनी कड़ाके की ठंड में कई राज्यों के किसान दिल्ली बॉर्डर पर पड़े हैं। सरकार उनसे बातचीत नहीं कर रही है। सरकार को किसानों की सभी आशंकाओं का निराकरण करना चाहिए। किसान हित में कृषि कानूनों में संशोधन करना चाहिए। अन्नदाता की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ेगी। मोदी सरकार को राजहठ छोड़कर राजधर्म निभाना चाहिए।
बड़के दद्दा ने कहा- देश का सारा किसान इस वक्त पूरी तरह खेती में व्यस्त हैं। उनके पास जरा भी समय नहीं है। आखिर ये कौन लोग हैं, जो दिल्ली के बॉर्डर पर पिछले 29 दिनों से डेरा डाले हैं? इसमें नाममात्र किसान हैं, जिन्हें विपक्षी दलों के कार्यकर्ता बरगला कर अपने साथ लाए हैं। उन्हें तीनों नए कृषि कानूनों की कतई जानकारी नहीं है।
केंद्र सरकार इन आंदोलनकरियों को वार्ता के लिए बुला रही है। परंतु, ये लोग मोदी विरोध के चलते हठधर्मिता पर उतारू हैं।
मुंशीजी ने बड़के दद्दा की बात का समर्थन करते हुए कहा- किसान आंदोलन के नाम पर कांग्रेस, कम्युनिस्ट, आप व अन्य राजनीतिक दलों का अपना एजेंडा चल रहा है। सभी को तीनों कानूनों को बारीकी से समझना चाहिए। कानून रद्द करने की मांग अनुचित है। इसके अलावा कृषि कानून की आड़ में अराजकता करना भी अक्षम्य है।हकीकत यह है कि ये तीनों कृषि कानून किसानों को और अधिक सक्षम बनाएंगे।
अंत में चतुरी चाचा ने मुझसे कोरोना अपडेट देने को कहा। मैंने सबको बताया कि विश्व में कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा आठ करोड़ पर पहुँचने वाला है। वहीं, अबतक करीब साढ़े 17 लाख लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में भी अबतक करीब एक करोड़ डेढ़ लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। यहां मौत का आंकड़ा डेढ़ लाख को छूने वाला है। एक तरफ विश्व के कई देशों में कोरोना की वैक्सीन लगनी शुरू हो गयी है। दूसरी तरफ ब्रिटेन में कोरोना का दूसरा रूप आ गया है। इससे पूरा विश्व चिंतित है। तमाम देशों ने ब्रिटेन से आवागमन पर रोक लगा दी है। कोरोना के दूसरे स्वरूप पर मौजूदा वैक्सीन कारगर होगी या नहीं। इस पर मंथन जारी हो गया है।
इसी के साथ आज की बतकही सम्पन्न हो गई। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाले प्रपंच को लेकर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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