डेस्क: मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहर लंबे समय से फिल्म इंडस्ट्री का प्रमुख केंद्र रहे हैं। यही वजह है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों के कई युवाओं को अभिनय और फिल्म निर्माण में करियर बनाने के लिए अपना घर छोड़ना पड़ता है। लेकिन क्या पहाड़ों में रहकर भी सिनेमा की दुनिया में अपनी पहचान बनाई जा सकती है? फिल्ममेकर अविनाश ध्यानी इसी सवाल का जवाब तलाशने के साथ उसे हकीकत में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड में फिल्म निर्माण की सुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से उन्होंने अविनाश ध्यानी फिल्म सिटी (ADFC) की परिकल्पना की है। यह पहल न केवल शूटिंग के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के नए रास्ते खोलने का प्रयास भी है।
फिल्मों के निर्माण के दौरान महसूस हुई सुविधाओं की कमी
उत्तराखंड में जन्मे और यहीं की संस्कृति में पले-बढ़े अविनाश ध्यानी के लिए अपने प्रदेश से जुड़ाव हमेशा खास रहा है। लेखक, निर्देशक और अभिनेता के तौर पर काम कर चुके अविनाश इससे पहले ’72 Hours’ जैसी फिल्म के जरिए उत्तराखंड के इतिहास और वीरता को बड़े पर्दे पर पेश कर चुके हैं। हालांकि, अपने गृह राज्य में काम करने के दौरान उन्हें फिल्म निर्माण से जुड़ी कई ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिन्होंने एक नई पहल की नींव रखी।
उनके मुताबिक, उत्तराखंड में प्राकृतिक लोकेशन्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन शूटिंग के लिए जरूरी बुनियादी व्यवस्थाएं हर जगह उपलब्ध नहीं हैं। किसी फिल्म की कहानी में गांव, अस्पताल, पुलिस स्टेशन, रेलवे स्टेशन या पुराने ब्रिटिशकालीन भवन की जरूरत हो तो इन सभी जगहों की तलाश और व्यवस्था करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसमें फिल्म की टीम का काफी समय और बजट खर्च होता है।
छोटे बजट की फिल्मों और स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। सीमित संसाधनों में पूरी फिल्म तैयार करने वाली टीमों के लिए बार-बार लोकेशन बदलना और जरूरी व्यवस्थाएं जुटाना आसान नहीं होता। इसी अनुभव ने अविनाश को उत्तराखंड में एक ऐसी जगह विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जहां फिल्मकारों को शूटिंग से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही परिसर में मिल सकें।
क्या है अविनाश ध्यानी फिल्म सिटी (ADFC) का प्लान?
ADFC यानी अविनाश ध्यानी फिल्म सिटी को एक ऐसे शूटिंग हब के तौर पर विकसित करने की योजना है, जहां फिल्म की अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक तैयार सेट उपलब्ध हों। इसकी परिकल्पना में गांव, पुलिस स्टेशन, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, मंदिर, ब्रिटिशकालीन इमारतों और पुराने बंगलों जैसी संरचनाएं शामिल हैं।
इसका मकसद फिल्मकारों को बार-बार अलग-अलग जगहों पर जाने की परेशानी से बचाना है। खासतौर पर कम बजट में फिल्म बनाने वाले निर्देशकों और नए फिल्ममेकर्स के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। अविनाश का मानना है कि किसी फिल्म को बनाने के लिए बड़े बजट से ज्यादा जरूरी एक अच्छी कहानी और उसे पर्दे पर उतारने का अवसर है। ADFC के जरिए वह ऐसे लोगों को भी मंच देना चाहते हैं, जिनके पास प्रतिभा और विचार तो हैं, लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
पहाड़ के युवाओं को अपने प्रदेश में मिलेगा काम
इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा उद्देश्य उत्तराखंड में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। राज्य में कई युवा अभिनय के अलावा कैमरा, लाइटिंग, साउंड, एडिटिंग और प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करने की इच्छा रखते हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण उन्हें दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।
अविनाश ध्यानी चाहते हैं कि ADFC के जरिए स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण की अलग-अलग जिम्मेदारियों से जुड़ने का मौका मिले। यहां उन्हें टेक्नीशियन, सिनेमैटोग्राफर, लाइटमैन, प्रोडक्शन मैनेजर और प्रोडक्शन हेड जैसे क्षेत्रों में काम करने के साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिल सकेगा।
उनकी सोच केवल शूटिंग के लिए लोगों को काम पर रखने तक सीमित नहीं है। वह चाहते हैं कि उत्तराखंड में ऐसी प्रतिभाएं तैयार हों, जो भविष्य में खुद फिल्म निर्माण की जिम्मेदारी संभाल सकें। इससे प्रदेश के युवाओं को अपने करियर के लिए बड़े शहरों पर निर्भर रहने की जरूरत भी कम हो सकती है।
चकराता की खूबसूरत वादियों में तैयार हो रही फिल्म सिटी
उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र में स्थित ADFC की खासियत यहां का प्राकृतिक वातावरण है। हिमालय के खूबसूरत नजारे, देवदार के घने पेड़, पहाड़ों की लंबी श्रृंखलाएं और सूर्यास्त के मनमोहक दृश्य इस जगह को फिल्मांकन के लिहाज से खास बनाते हैं।
यहां फिल्मकारों को तैयार किए जा रहे सेट के साथ प्राकृतिक लोकेशन्स का भी लाभ मिल सकता है। रोमांटिक गानों, भावनात्मक दृश्यों, अलग-अलग तरह की कहानियों और आउटडोर शूटिंग के लिए यह क्षेत्र काफी संभावनाएं रखता है। अविनाश का मानना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती और यहां की स्थानीय कहानियां फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ी ताकत बन सकती हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि फिल्म निर्माण के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएं।
अपनी फिल्मों के जरिए भी विकसित कर रहे हैं ADFC
अविनाश ध्यानी की यह योजना अब फिल्मों की शूटिंग के जरिए भी आगे बढ़ रही है। उनकी आगामी फिल्म ‘Tu Tum Aur Main’ की शूटिंग ADFC में की जा रही है। इसके अलावा उनकी ऐतिहासिक युद्ध फिल्म ‘VC-571 (Victoria Cross)’ के लिए भी यहां विशेष सेट तैयार किए जा रहे हैं।
यह फिल्म प्रथम विश्व युद्ध के वीर भारतीय सैनिक राइफलमैन गबर सिंह नेगी के जीवन पर आधारित है। इसके लिए युद्धभूमि, ट्रेंच और युद्ध से जुड़ी दूसरी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इन फिल्मों के माध्यम से फिल्म सिटी की सुविधाओं को विकसित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आगे चलकर दूसरे प्रोडक्शन हाउस और फिल्ममेकर भी यहां शूटिंग कर सकें।
फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने में सरकार के साथ निजी प्रयास भी जरूरी
उत्तराखंड सरकार फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म नीति और सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। इससे राज्य में फिल्मों की शूटिंग और फिल्म उद्योग से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। अविनाश ध्यानी भी सरकारी सहयोग को महत्वपूर्ण मानते हैं, लेकिन उनका मानना है कि किसी भी क्षेत्र में फिल्म इंडस्ट्री को मजबूत बनाने के लिए निजी स्तर पर भी प्रयास होने चाहिए।
उनके अनुसार, फिल्मकारों को सिर्फ सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपने अनुभव और संसाधनों के जरिए भी ऐसी सुविधाएं विकसित करनी चाहिए, जिनका लाभ भविष्य के कलाकारों और फिल्म निर्माताओं को मिल सके। ADFC इसी दिशा में उठाया गया एक कदम है।
आने वाली पीढ़ी के लिए पहाड़ में ही सिनेमा का रास्ता बनाना चाहते हैं अविनाश
अविनाश ध्यानी की फिल्म सिटी की योजना के पीछे सिर्फ शूटिंग की सुविधा तैयार करना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में सिनेमा के लिए एक मजबूत आधार बनाना है। वह चाहते हैं कि स्थानीय युवाओं को अपने हुनर को निखारने और फिल्म निर्माण में आगे बढ़ने के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी न हो।
उनकी कोशिश है कि उत्तराखंड की कहानियों को स्थानीय स्तर पर ही फिल्माया और विकसित किया जा सके, जिससे प्रदेश की संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक खूबसूरती को भी बड़े स्तर पर पहचान मिले। एक फिल्ममेकर के रूप में अपने संघर्षों से मिले अनुभव को वह अब आने वाली पीढ़ी के लिए अवसर में बदलना चाहते हैं।
ADFC इसी सोच का नतीजा है। एक ऐसी पहल, जिसके जरिए अविनाश ध्यानी उत्तराखंड में फिल्म निर्माण की संभावनाओं को नई दिशा देने और पहाड़ के युवाओं को उनके अपने क्षेत्र में सिनेमा से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराने का सपना देख रहे हैं।


