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सोनी सब के सितारों ने साझा कीं बचपन की दिवाली से जुड़ी खास यादें

डेस्क: दिवाली का त्योहार सिर्फ घरों को रोशन करने और मिठाइयों का स्वाद लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई ऐसी यादें भी होती हैं, जो सालों बाद भी चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। बचपन में नए कपड़े पहनने से लेकर परिवार के साथ पूजा करने, पटाखे जलाने और घर को सजाने तक, हर किसी के लिए इस त्योहार की अपनी अलग कहानी होती है। इस बार सोनी सब के कलाकार करुणा पांडे, मुकुल हरीश, विवाना सिंह और जितेन लालवानी ने भी अपने बचपन की दिवाली से जुड़े कुछ खास अनुभव साझा किए हैं। इन कलाकारों ने बताया कि उनके लिए त्योहार का कौन-सा पल सबसे ज्यादा यादगार रहा है।

करुणा पांडे को याद आते हैं परिवार के साथ बिताए पल
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में पुष्पा का किरदार निभाने वाली करुणा पांडे ने बताया कि उनके बचपन की दिवाली हर बार कुछ अलग होती थी। उनके पिता रक्षा बलों में कार्यरत थे, इसलिए परिवार को हर कुछ साल में दूसरे शहर में जाना पड़ता था और वहीं त्योहार मनाना होता था। घर को दीयों और रोशनी से सजाना, रिश्तेदारों और मेहमानों का आना और मां के हाथों से बने पकवानों का आनंद लेना उनकी यादों का खास हिस्सा है।
करुणा के मुताबिक, बचपन में उन्हें सबसे ज्यादा इंतजार पूजा खत्म होने का रहता था, क्योंकि इसके बाद मिठाइयां खाने और पटाखे जलाने का मौका मिलता था। माता-पिता और बहन के साथ मनाई गई वे दिवालियां आज भी उनके दिल के बेहद करीब हैं।
मुकुल हरीश के लिए दिवाली का मतलब है खुशियां और मिठाइयां
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में टाइगर की भूमिका निभाने वाले मुकुल हरीश ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि दिवाली का उत्साह उनके लिए हमेशा खास रहा है। सुबह जल्दी उठकर नए कपड़े पहनना और शाम को परिवार के साथ पूजा में शामिल होना उनकी त्योहार की दिनचर्या का हिस्सा हुआ करता था।
उन्होंने अपने पिता की फैक्ट्री में होने वाली दिवाली पूजा का भी जिक्र किया। वहां की सजावट और उत्सव का माहौल उन्हें आज भी याद है। मुकुल के लिए मिठाइयां खाना और पटाखे जलाना त्योहार के सबसे मजेदार हिस्से हुआ करते थे। हालांकि, अब वह दिवाली मनाते समय रोशनी और स्वादिष्ट पकवानों के साथ पर्यावरण का ध्यान रखने को भी प्राथमिकता देते हैं।
बहनों के साथ तैयार होना विवाना सिंह की सबसे प्यारी याद
‘हस्तिनापुर के वीर’ में गांधारी का किरदार निभाने वाली विवाना सिंह ने बताया कि बचपन में दिवाली की तैयारियां उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं होती थीं। उन्हें अपनी बहनों के साथ त्योहार के लिए तैयार होने का बेसब्री से इंतजार रहता था। तीनों बहनें एक-दूसरे के कपड़े चुनने में मदद करती थीं और अपने लुक को खास बनाने के लिए एक-दूसरे की ज्वेलरी भी इस्तेमाल करती थीं।
विवाना के अनुसार, तैयार होने के दौरान खूब हंसी-मजाक और मस्ती होती थी। उनके लिए दिवाली की असली खुशी परिवार के साथ बिताए गए इन्हीं छोटे-छोटे पलों में छिपी है।
जितेन लालवानी को याद है मां के साथ घर की सफाई करना
‘हस्तिनापुर के वीर’ में द्रोणाचार्य की भूमिका निभाने वाले जितेन लालवानी ने दिवाली से जुड़ी अपनी एक अलग याद साझा की। उन्होंने बताया कि त्योहार से पहले घर की सफाई करना उनकी मां की तैयारियों का अहम हिस्सा हुआ करता था। मां हमेशा उन्हें भी इस काम में मदद करने के लिए कहती थीं।
बचपन में उन्हें यह काम थोड़ा मुश्किल लगता था, लेकिन मां के साथ मिलकर सफाई और घर को व्यवस्थित करने में अलग ही मजा आता था। आज उन्हें एहसास होता है कि मां के साथ बिताए गए वही साधारण पल उनके बचपन की सबसे अनमोल यादों में शामिल हो गए हैं। इन कलाकारों की बातें बताती हैं कि दिवाली की खूबसूरती सिर्फ रोशनी, सजावट और पकवानों में नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए उन पलों में भी है, जिन्हें हम जिंदगीभर याद रखते हैं। ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ और ‘हस्तिनापुर के वीर’ देखना न भूलें, सिर्फ सोनी सब पर।

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