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US मेडिकल जर्नल रिपोर्टः रात में टांगों-पैरों की नसों में दर्दनाक ऐंठन को न करें नजरअंदाज, RLS हो सकता बड़ा कारण

डेस्क: रात में सोते समय पैरों में दर्द, अचानक मांसपेशियों का सिकुड़ना, झुनझुनी या लगातार पैर हिलाने की इच्छा को अक्सर एक ही समस्या समझ लिया जाता है। लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, ये लक्षण अलग-अलग स्थितियों की ओर इशारा कर सकते हैं। रात में मांसपेशियों में अचानक दर्दनाक खिंचाव को नाइट लेग क्रैम्प्स कहा जाता है, जबकि आराम करते समय पैरों में बेचैनी और उन्हें हिलाने की तीव्र इच्छा रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS) का प्रमुख लक्षण है। अमेरिकी मेडिकल जर्नल ‘जामा’ में 2026 में प्रकाशित एक समीक्षा के मुताबिक, अमेरिका के लगभग 3 प्रतिशत वयस्कों में RLS के मध्यम से गंभीर लक्षण पाए जाते हैं। यह समस्या नींद की गुणवत्ता और जीवन की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। शोध के अनुसार, इसके लक्षण शाम और रात में अधिक होते हैं तथा आराम करने पर बढ़ते हैं।

सबसे पैर की नस खिंचना और RLS में के लक्षणों में अंतर समझना जरूरी है।
नाइट लेग क्रैम्प्स (रात में मांसपेशियों की ऐंठन) 
पिंडली या पैर की मांसपेशियों में अचानक तेज दर्द होता है।
प्रभावित मांसपेशी सख्त हो जाती है और गांठ जैसी महसूस हो सकती है।
पैर की उंगलियां अनायास एक दिशा में खिंच सकती हैं।
ऐंठन कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक रह सकती है।
मांसपेशियों को धीरे-धीरे खींचने और मालिश करने से राहत मिल सकती है।

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS)
पैरों के अंदर बेचैनी, झुनझुनी, दर्द या कुछ रेंगने जैसा एहसास होता है।
पैर हिलाने या चलने की तीव्र इच्छा होती है।
लंबे समय तक बैठने या लेटने पर परेशानी बढ़ती है।
चलने-फिरने या पैर हिलाने से अस्थायी राहत मिलती है।
शाम और रात में लक्षण अधिक परेशान करते हैं।
RLS की पहचान के लिए इन लक्षणों के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि परेशानी किसी दूसरी बीमारी या सामान्य मांसपेशियों की ऐंठन के कारण तो नहीं है।

रात में पैरों में ऐंठन और बेचैनी के कारण
चिकित्सकीय शोध के अनुसार, दोनों समस्याओं के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
मांसपेशियों की थकानः अधिक शारीरिक मेहनत, मांसपेशियों पर दबाव और कुछ तंत्रिका संबंधी समस्याएं रात में ऐंठन की वजह बन सकती हैं।
आयरन की कमी: शरीर में आयरन का स्तर कम होने से RLS का खतरा बढ़ सकता है। मस्तिष्क में आयरन की उपलब्धता और डोपामिन से जुड़ी प्रक्रियाएं इस बीमारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान, खासकर तीसरी तिमाही में, RLS के लक्षण अधिक देखे जा सकते हैं।
किडनी की बीमारी: गंभीर किडनी रोग और डायलिसिस करा रहे मरीजों में RLS की संभावना सामान्य लोगों से अधिक होती है।
तंत्रिका संबंधी समस्याएं: मधुमेह से जुड़ी नसों की क्षति और पेरिफेरल न्यूरोपैथी में पैरों में झुनझुनी, जलन और दर्द हो सकता है। हालांकि, ऐसे लक्षण अपने आप में RLS की पुष्टि नहीं करते।
दवाओं का प्रभाव: कुछ अवसादरोधी दवाएं, एलर्जी की कुछ दवाएं और डोपामिन को प्रभावित करने वाली दवाएं RLS के लक्षण बढ़ा सकती हैं।

 RLS की पहचान के लिए कौन-सी जांच जरूरी?
अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुसार, RLS का निदान मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों और चिकित्सकीय इतिहास के आधार पर किया जाता है। इसकी पुष्टि के लिए हर मरीज को स्लीप स्टडी कराने की जरूरत नहीं होती।

डॉक्टर निम्न जांचों की  दे सकते सलाह हैं:
सीरम फेरिटिन: शरीर में आयरन के भंडार की जानकारी के लिए।
ट्रांसफेरिन सैचुरेशन (TSAT): शरीर में आयरन की उपलब्धता जानने के लिए।
कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC): खून की कमी और अन्य रक्त संबंधी स्थितियों की पहचान के लिए।
किडनी फंक्शन टेस्ट: जरूरत पड़ने पर गुर्दों की कार्यक्षमता जांचने के लिए।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (AASM) के दिशानिर्देशों के अनुसार, वयस्क RLS मरीजों में फेरिटिन 75 ng/mL या उससे कम अथवा ट्रांसफेरिन सैचुरेशन 20 प्रतिशत से कम होने पर आयरन उपचार पर विचार किया जाता है। फेरिटिन 75 से 100 ng/mL के बीच होने पर विशेष परिस्थितियों में नसों के जरिए आयरन देने की सलाह दी जा सकती है। ये सीमाएं RLS के उपचार संबंधी दिशानिर्देश हैं, सामान्य आबादी में आयरन की कमी की जांच के मानक नहीं।

RLS का इलाज  
RLS के उपचार में सबसे पहले उन कारणों की पहचान की जाती है, जो इसके लक्षण बढ़ा सकते हैं।
आयरन की कमी दूर करना: यदि जांच में आयरन का स्तर कम मिलता है तो डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार आयरन की दवा या नसों के जरिए आयरन देने का फैसला कर सकते हैं।
गैबापेंटिन और प्रीगैबालिन: अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के दिशानिर्देशों में गैबापेंटिन, गैबापेंटिन एनाकार्बिल और प्रीगैबालिन को वयस्क RLS मरीजों के लिए प्रभावी उपचार विकल्पों में शामिल किया गया है। इनका इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में किया जाना चाहिए।
लक्षण बढ़ाने वाली दवाओं की समीक्षा: कुछ अवसादरोधी, एलर्जी और अन्य दवाएं RLS को बढ़ा सकती हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार इनके विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
डोपामिन एगोनिस्ट का सीमित इस्तेमाल: रोपिनिरोल और प्रामिपेक्सोल जैसी दवाओं को अब नियमित रूप से पहला उपचार विकल्प नहीं माना जाता, क्योंकि लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से लक्षण पहले की तुलना में अधिक गंभीर हो सकते हैं। इस स्थिति को ऑगमेंटेशन कहते हैं।

रात में पैर खिंचने से बचने के लिए क्या करें? अगर समस्या सामान्य मांसपेशियों की ऐंठन है तो कुछ उपाय राहत दे सकते हैं ।
सोने से पहले पिंडली की मांसपेशियों की हल्की स्ट्रेचिंग करें।
ऐंठन होने पर पैर सीधा करके पंजों को धीरे-धीरे अपनी तरफ खींचें।
प्रभावित मांसपेशी की हल्की मालिश करें।
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।
RLS के मरीजों को नियमित नींद का समय बनाए रखने, शाम के समय कैफीन से बचने और हल्की शारीरिक गतिविधि करने से मदद मिल सकती है।
मैग्नीशियम, कैल्शियम या पोटेशियम के सप्लीमेंट बिना कमी की पुष्टि और डॉक्टर की सलाह के नहीं लेने चाहिए।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
यदि पैरों में बार-बार दर्द, बेचैनी या झुनझुनी होती है और इससे नींद प्रभावित हो रही है तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। पैरों में लगातार सुन्नपन, कमजोरी या बढ़ता हुआ दर्द भी जांच की मांग करता है। यदि एक पैर में अचानक सूजन, लालिमा, गर्माहट और दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह खून का थक्का बनने जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।

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