डेस्क: धनतेरस के अवसर पर वाराणसी के बांसफाटक स्थित श्री काशी अन्नपूर्णा मठ मंदिर में स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन के साथ श्रद्धालुओं को खजाने के रूप में सिक्कों का वितरण किया जाएगा। इस बार धनतेरस पर निर्धारित समय से एक घंटे पहले मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। पांच दिनों तक श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा, भूमि देवी, मां लक्ष्मी और रजत महादेव के दर्शन कर सकेंगे।
महंत शंकर पुरी ने बताया कि इस वर्ष धनतेरस पर अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इससे देश में समृद्धि बनी रहेगी और कोष भरा रहेगा। महंत ने बताया कि धनतेरस के दिन अभिजीत मुहूर्त में भोर के समय मां का विधि-विधान से पूजन और आरती की जाएगी। इसके बाद खजाने तथा 21 किलोग्राम के रजत खजाने का पूजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को छह नवंबर को धनतेरस के दिन मंदिर बंद होने तक खजाना वितरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष में केवल पांच दिनों के लिए स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन होते हैं। 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव के अवसर पर लड्डुओं की भव्य झांकी सजाई जाएगी। रात्रि 11:30 बजे मां की महाआरती होगी। इसके बाद स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के कपाट एक वर्ष के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भक्त बांसफाटक से गेट नंबर एक, ढुंढिराज के रास्ते मंदिर पहुंचेंगे। वहां बनाई गई अस्थायी सीढि़यों से होकर स्वर्णमयी मां के दर्शन करेंगे। इसके बाद कालिका गली से बाहर निकलेंगे। मंदिर के प्रबंधक काशी मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है। धनतेरस के दिन सुबह पांच बजे से पूर्वाह्न 11:30 बजे तक स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन और खजाना वितरण होगा। वहीं, छह नवंबर से 10 नवंबर तक श्रद्धालु प्रतिदिन सुबह पांच बजे से रात्रि 11:15 बजे तक भगवती अन्नपूर्णा के दर्शन कर सकेंगे।


