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शुक्र प्रदोष के शुभ संयोग में मनेगा धनतेरस, जानें पूजा और खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त

डेस्क : दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। खास बात यह है कि इस साल धनतेरस का त्योहार शुक्रवार यानी शुक्र प्रदोष के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होने के कारण इस संयोग को और भी खास माना जा रहा है। अगर आप भी इस दिन खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय नोट कर लें।

धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त
इस साल 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी। वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पंडित वेदप्रकाश मिश्रा के अनुसार, धनतेरस पर प्रदोष काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार प्रदोष काल शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक रहेगा। यानी पूजा के लिए करीब ढाई घंटे का शुभ समय मिलेगा। इस दौरान भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा-अर्चना की जा सकती है।
धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन नई चीजें खरीदने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का आगमन होता है।
इस दिन खरीदारी के लिए ये शुभ समय बताए गए हैं
शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 8:16 बजे से 9:48 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:56 बजे तक।
प्रदोष काल: शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और बर्तन खरीदते हैं। हालांकि, अगर आपका बजट कम है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप पीतल या तांबे के बर्तन भी खरीद सकते हैं। इसके अलावा धनतेरस पर खील और साबुत धनिया खरीदने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इन चीजों को घर लाने से सुख-समृद्धि आती है। इसलिए जरूरी नहीं कि आप महंगी चीजें ही खरीदें, अपनी क्षमता के अनुसार शुभ वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं।
कैसे हुआ था भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक और आरोग्य का देवता माना जाता है। भगवान धन्वंतरि के हाथों में अमृत कलश था, जिसे जीवन, स्वास्थ्य और अमरत्व का प्रतीक माना जाता है। श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध में समुद्र मंथन की कथा का वर्णन मिलता है। इसी कथा से भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की मान्यता जुड़ी हुई है। यही वजह है कि धनतेरस के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि की आराधना करके अपने और परिवार के लिए अच्छे स्वास्थ्य, निरोगी जीवन और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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