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कर्नाटक में गन्ना किसानों का ”जेल भरो” आंदोलन शुरू, पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया

डेस्क: कर्नाटक में गन्ना किसानों ने गुरुवार को ‘जेल भरो’ आंदोलन शुरू किया। वे राज्य सरकार से प्रति टन 1,000 रुपए की सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। इस दौरान पुलिस ने प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया और उत्तरी कर्नाटक के बेलगावी के बाहरी इलाके में उनके विरोध प्रदर्शन को रोक दिया। किसानों की मांग है कि चीनी मिलें उन्हें प्रति टन 4,500 रुपये का भुगतान करें और राज्य सरकार इसमें 1,000 रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दे, जिससे कुल खरीद मूल्य 5,500 रुपए प्रति टन हो जाए। वे यह भी मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) मौजूदा 31 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलोग्राम करे।

पुलिस ने बेलगावी शहर के बाहरी इलाके में मुक्ति मठ के पास प्रदर्शनकारी किसानों को रोका, जिसके बाद किसानों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता चूनप्पा पुजारी को बेलगावी के पास गुरलापुरा से हिरासत में ले लिया गया। इस आंदोलन से जुड़े एक अन्य प्रमुख नेता शशिकांत गुरुजी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस बस में ले जाए जाते समय पुजारी ने कहा कि वह जेल जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को किसानों को प्रति टन गन्ने पर 1,000 रुपए की सब्सिडी देनी ही होगी। उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे जेल होती है तो कोई बात नहीं, लेकिन किसानों को सरकार से 1,000 रुपए की सब्सिडी मिलनी चाहिए। कर्नाटक बंद होगा। कोई भी चीनी मिल काम नहीं कर पाएगी। वे तभी काम कर सकेंगी जब समझौता लागू हो जाएगा।’ पुजारी ने मांग की कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार बुधवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में प्रति टन 1,000 रुपए की सब्सिडी की घोषणा करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसान अपना आंदोलन जारी रखेंगे और जहां भी अधिकारी उनके प्रदर्शन को रोकने की कोशिश करेंगे, वहां वे सड़कों को जाम कर देंगे। पुजारी ने कहा, ‘हम डरने वाले नहीं हैं। चीनी मिल मालिकों को सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करनी चाहिए कि वे गन्ने के लिए 3,600 रुपए प्रति टन का भुगतान करने को तैयार हैं। जब तक सरकार 1,000 रुपए की सब्सिडी की घोषणा नहीं करती, तब तक हमारी मांग है कि प्रशासन हमें जेल में ही रखे।’
किसान नेताओं की गिरफ्तारी ने गन्ना किसानों के चल रहे आंदोलन से जुड़े तनाव को और बढ़ा दिया है। ये किसान राज्य सरकार और चीनी मिल मालिकों पर गन्ने के उचित मूल्य की अपनी मांगें पूरी करने का दबाव बना रहे हैं। उम्मीद है कि राज्य सरकार आज होने वाली कैबिनेट बैठक में गन्ना किसानों के मुद्दे पर चर्चा करेगी। गौरतलब है कि कर्नाटक के बेलगावी जिले में गन्ना किसानों ने सरकार को गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करने के लिए एक नई समय-सीमा दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अपने ‘जेल भरो’ आंदोलन को और तेज करेंगे और एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे।
मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के मंत्री और बेलगावी जिले के प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली ने चीनी मिल मालिकों और किसानों के बीच गतिरोध को खत्म करने के लिए दो दौर की बातचीत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। स्थिति की गंभीरता और बढ़ते असंतोष को देखते हुए जारकीहोली बुधवार को चीनी मिल मालिकों के साथ एक और दौर की बातचीत कर रहे हैं। मैसूरु, मांड्या, हावेरी और अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन किए गए हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले कुछ हफ्तों से गन्ना किसानों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। किसान पदयात्राएं निकाल रहे हैं, राजमार्गों को जाम कर रहे हैं, विरोध मार्च कर रहे हैं और पूरे राज्य में प्रदर्शन कर रहे हैं। 5,500 रुपए प्रति टन की तत्काल मांग के अलावा किसान संगठन केंद्र सरकार से चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को 31 रुपए से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलोग्राम करने, उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) की समीक्षा करने, 14 दिनों के भीतर समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग-अलग कीमतें तय करने, गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की खरीद और कीमत में बदलाव करने, तथा एक व्यापक चीनी नीति बनाने की मांग भी कर रहे हैं।
अक्टूबर के मध्य में कर्नाटक के मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। उन्होंने केंद्र से किसानों की प्रमुख मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील भी की थी। इससे पहले किसानों ने अपनी उपज के लिए बेहतर दाम की मांग करते हुए पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग को 30 घंटे से अधिक समय तक जाम कर दिया था। इसके बाद 26 अक्टूबर को बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में सरकार, चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक हुई, लेकिन इससे भी यह मुद्दा हल नहीं हो सका।
26 अक्टूबर की बातचीत के दौरान सरकार ने चीनी मिलों से किसानों को प्रति टन 250 रुपए अतिरिक्त देने का आग्रह किया था, लेकिन कई मिलों ने इस प्रस्ताव को लागू नहीं किया। अपने ‘जेल भरो’ कार्यक्रम के तहत किसानों ने ‘कैदी नंबर 5,500’ लिखे टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया जो प्रति टन गन्ने के दाम की उनकी मांग को दर्शाता है और बेलगावी की हिंडलगा सेंट्रल जेल की ओर मार्च किया। किसान संगठन अब 6 नवंबर को बेंगलुरु में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद गांव-गांव स्तर पर और अधिक लोगों को एकजुट करने का काम किया जाएगा।

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