डेस्क: राजस्थान में देश की सरहद की सुरक्षा करते हुए दुर्गम पहाड़ों में कर्तव्य निभाने वाले अग्निवीर ग्रैनेडियर समुद्र सिंह गुर्जर का साहस और बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली क्षेत्र में 14 अगस्त को आए भीषण भूस्खलन के दौरान पांच जवानों के साथ लापता हुए समुद्र सिंह का पार्थिव शरीर 74 दिन की लंबी तलाश के बाद बरामद हुआ।
सेना के कठिन तलाशी अभियान और डीएनए जांच के बाद उनकी पहचान सुनिश्चित हुई। इसके बाद परिवार ने अपने हाथों से अंतिम विदाई दी और उनकी अस्थियां पैतृक गांव केसरपुरा पहुंचीं, जहां सर्व समाज ने नम आंखों से वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। समुद्र सिंह की वीरता और उनके बलिदान को याद करते हुए मेजर रायगोंड चटरक्की ने वीडियो संदेश जारी करके उन्हें नमन किया। मेजर ने बताया कि समुद्र सिंह की तैनाती देश के एक बेहद संवेदनशील और दुर्गम सीमा क्षेत्र में थी। यहां जवानों को दुश्मन की चुनौतियों के साथ-साथ विषम मौसम, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं का भी सामना करना पड़ता है। बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।
प्राकृतिक आपदा में बह गए थे पांच जवान
इन तमाम मुश्किलों के बावजूद समुद्र सिंह पूरी मुस्तैदी और बहादुरी के साथ अपनी चौकी पर तैनात रहकर देश की सुरक्षा में जुटे थे। उन्होंने बताया कि इसी दौरान 14 अगस्त को शाम करीब पांच बजे अचानक बादल फटने के बाद भीषण भूस्खलन हुआ। पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर जवानों के तंबू और कैंपिंग क्षेत्र को अपनी चपेट में लेते हुए नीचे चला गया। समुद्र सिंह के भाई चन्दगी राम गुर्जर ने अपने वीडियो वक्तव्य में हादसे की जानकारी देते हुए बताया कि उस समय पांच से सात जवान मौके पर मौजूद थे। कुछ जवान खाना लेने गए थे, कुछ बाहर फोन पर बात कर रहे थे, जबकि पांच जवान तंबू के अंदर ड्यूटी पर थे। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा में पांच जवान बह गए, जिनमें समुद्र सिंह भी शामिल थे। हादसे के बाद सेना ने लापता जवानों की तलाश के लिए व्यापक खोज अभियान चलाया। दुर्गम पहाड़ी इलाका और लगातार बनी कठिन परिस्थितियां तलाश अभियान की बड़ी चुनौती थीं।
डीएनए जांच से हुई पहचान
परिवार की उम्मीदें हर दिन सेना के अभियान से जुड़ी रहीं, लेकिन समुद्र सिंह का पार्थिव शरीर 74 दिन बाद बरामद हो सका। इसके बाद परिजनों को बुलाया गया और डीएनए जांच के जरिए उनकी पहचान की पुष्टि की गई। लंबे इंतजार के बाद परिवार को अपने वीर बेटे का पार्थिव शरीर मिला। परिजनों ने अपने हाथों से मुखाग्नि देकर उन्हें अंतिम विदाई दी। इसके बाद उनकी अस्थियां आर्मी शिविर से ईटाराणा होते हुए पैतृक गांव केसरपुरा लाई गईं। गांव पहुंचने पर सर्व समाज के लोगों ने वीर सपूत का स्वागत और श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरे क्षेत्र में शोक और गर्व का माहौल रहा। मेजर रायगोंड चटरक्की ने कहा कि भारतीय सेना की ग्रैनेडियर रेजिमेंट और उनका पूरा गांव समुद्र सिंह के साहस को नमन करता है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि इस मुश्किल समय में शहीद समुद्र सिंह के परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहें और परिवार को जब भी जरूरत पड़े, हरसंभव सहयोग करें।


