दरभंगा

गंगा उत्सव–2026 के प्रथम दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन, युवाओं ने साझा किये नदी संरक्षण के नवाचारपूर्ण विचार

 

नदी संवाद में जलस्रोतों के संरक्षण पर हुआ विचार-मंथन; दीघी तालाब के तट पर भव्य गंगा आरती एवं 1,000 दीपों के प्रज्वलन से दिया जल संरक्षण का संदेश।

 

 

दरभंगा 03 नवंबर 2026 :- गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किए जाने वाले गंगा उत्सव के क्रम में, नदी संरक्षण, स्वच्छता, सांस्कृतिक विरासत एवं जनभागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला गंगा समिति, दरभंगा द्वारा जिला पदाधिकारी-सह-अध्यक्ष, जिला गंगा समिति, दरभंगा श्री कौशल कुमार के निर्देशानुसार 03 एवं 04 नवंबर को दो दिवसीय ‘गंगा उत्सव–2026’ का आयोजन किया जा रहा है। उत्सव के प्रथम दिन चन्द्रधारी संग्रहालय, दरभंगा में विभिन्न शैक्षणिक, संवादात्मक एवं दीपोत्सव सत्रों का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ पोस्टर विमोचन एवं पौधा रोपण के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र के दौरान जिला परियोजना पदाधिकारी, जिला गंगा समिति, दरभंगा फारूक इमाम ने वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए दो दिवसीय गंगा उत्सव–2026 की संकल्पना, उद्देश्यों एवं आयोजन की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गंगा नदी को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गंगा उत्सव का उद्देश्य नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण, स्वच्छता और संवर्धन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों एवं आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने कहा कि नदियां हमारी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं सामाजिक जीवन का भी अभिन्न हिस्सा हैं, इसलिए इनके संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देना आवश्यक है। उन्होंने उत्सव के विभिन्न सत्रों—नदी संवाद, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत परिचय, वॉलंटियर संवाद तथा दीपोत्सव—की जानकारी देते हुए प्रतिभागियों से सक्रिय सहभागिता की अपील की। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा गंगा उत्सव–2026 से संबंधित आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया गया।

 

इस अवसर पर चन्द्रधारी संग्रहालय के संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. रविकांत ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी क्षेत्र की नदियां, तालाब एवं जलस्रोत उसकी प्राकृतिक संपदा होने के साथ-साथ उसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत पहचान के भी महत्वपूर्ण आधार होते हैं। मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की सभ्यता, परंपराएं एवं लोकजीवन नदियों और जलस्रोतों से गहराई से जुड़े रहे हैं। अतः इनका संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत एवं भावी पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।

 

इसके बाद ‘नदी संवाद – River Dialogue: Connecting People with Rivers’ सत्र का आयोजन किया गया। सत्र में नदी संरक्षण, जलस्रोतों की स्वच्छता, नदियों के सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व तथा जनभागीदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें वक्ता के रूप में डॉ. सुनीता कुमारी, सहायक प्राध्यापक, विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा; डॉ. गजेन्द्र भारद्वाज, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, मारवाड़ी कॉलेज, दरभंगा तथा डॉ. सोनू रजक, सहायक प्राध्यापक, कॉलेज ऑफ टीचर्स एजुकेशन, मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय, दरभंगा ने अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही युवा संवाद के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने विचार एवं अनुभव व्यक्त करने का अवसर दिया गया।

 

उत्सव के अगले सत्र ‘Voice of Volunteers – My Ideas for Cleaner Darbhanga & Conservation of Water Bodies’ में युवाओं एवं स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। सत्र के प्रारंभ में जिला परियोजना पदाधिकारी फारूक इमाम ने सभी को अपने विचार, अनुभव एवं नवाचारपूर्ण सुझाव खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वच्छ दरभंगा एवं नदियों, तालाबों और अन्य जलस्रोतों के संरक्षण के लिए नए विचारों, रचनात्मक पहलों एवं व्यावहारिक समाधानों के साथ आगे आना चाहिए। उन्होंने स्थानीय समस्याओं की पहचान करने, उनके प्रभावी समाधान सुझाने, जनभागीदारी बढ़ाने तथा छोटे-छोटे लेकिन प्रभावशाली प्रयासों के माध्यम से बदलाव लाने की दिशा में युवाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया।

 

उन्होंने स्वयंसेवकों से केवल अभियान का हिस्सा बनने के बजाय स्वयं पहल करने और समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनने का आह्वान किया।

 

इस क्रम में इच्छुक स्वयंसेवकों ने मंच से बारी-बारी अपने विचार, अनुभव एवं सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने जलस्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण, जनजागरूकता एवं युवाओं की भूमिका से संबंधित विभिन्न रचनात्मक सुझाव साझा किए। आमंत्रित वक्ताओं ने भी अपने विचारों एवं मार्गदर्शन से युवाओं का उत्साहवर्धन किया।

 

कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता ही सेवा अभियान–2026 के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त प्रतियोगिताओं के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जूरी सदस्यों को भी स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

 

दिन के अंतिम सत्र ‘दीप से संकल्प – Message for Conservation of Water Bodies’ के अंतर्गत दरभंगा स्थित दीघी तालाब के तट पर भव्य गंगा आरती एवं दीपोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत गंगा आरती के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण के बीच मां गंगा के प्रति आस्था व्यक्त करते हुए नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण का संकल्प दोहराया गया। इसके उपरांत तालाब के तट पर लगभग 1,000 दीपों का प्रज्वलन किया गया। एक साथ प्रज्वलित दीपों से दीघी तालाब का तट जगमगा उठा और वहां उपस्थित लोगों के लिए यह दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा।

 

उद्घाटन सहित विभिन्न सत्रों का मंच संचालन क्रमशः श्री प्रसन्न जी चौधरी, सुश्री रचना झा एवं सुश्री सफीना महफ़ूज़ द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के सफल आयोजन में पूजा कुमारी, संजीव कुमार, सुनील कुमार, मणिकांत ठाकुर, सूरज कुमार, साक्षी कुमारी, मनीषा कुमारी, नयन प्रिया, आरती ज्योति, सोनाली कुमारी आदि का विशेष योगदान रहा।

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