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जयपुर में लॉन्च हुई सोने की परत वाली अशर्फी मिठाई, 9 ग्राम की कीमत 1,111 रुपये..

डेस्क: दीपावली (Diwali) के त्योहार पर मिठाइयों का लेन-देन खुशियां बांटने की पुरानी परंपरा है। आमतौर पर लोग इस मौके पर काजू कतली, लड्डू, ड्राई फ्रूट्स और दूसरी पारंपरिक मिठाइयां खरीदते हैं। लेकिन राजस्थान (Rajasthan) की राजधानी जयपुर (Jaipur) में इस बार एक ऐसी खास मिठाई पेश की गई है, जिसकी कीमत जानकर लोग हैरान हो सकते हैं। इसका नाम ‘त्योहार अशर्फी’ (Tyohar Asharfi) रखा गया है। देखने में सोने के पुराने सिक्के (Gold Coins) जैसी इस मिठाई का एक छोटा सा टुकड़ा भी काफी महंगा है।
इस विशेष मिठाई के एक पीस का वजन महज 9 ग्राम है और इसकी कीमत 1,111 रुपये निर्धारित की गई है। इस हिसाब से एक किलो मिठाई की कीमत लगभग 1,23,444 रुपये बैठती है। यानी इसकी कीमत में दोपहिया वाहन खरीदा जा सकता है। इसे खास तौर पर दीपावली के अवसर पर महंगे और अलग तरह के उपहार देने की इच्छा रखने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
जयपुर के एक मिठाई आउटलेट ने इसे त्योहार के विशेष उपहार के रूप में पेश किया है। इस आउटलेट की संस्थापक अंजलि जैन हैं, जिन्होंने पारंपरिक अशर्फी की अवधारणा को मिठाई के रूप में नया रूप देने का विचार रखा। पुराने समय में सोने की अशर्फियां संपन्नता, खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती थीं। इन्हें खास अवसरों पर उपहार के रूप में देने की परंपरा भी रही है। इसी ऐतिहासिक पहचान से प्रेरित होकर इस मिठाई को तैयार किया गया है।
‘त्योहार अशर्फी’ की बनावट और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री इसे सामान्य मिठाइयों से अलग बनाती है। इसके अंदर बादाम से तैयार किया गया हिस्सा रखा गया है। इसमें खाने योग्य सोने का इस्तेमाल किया गया है। इसके ऊपर सोने की पतली परत चढ़ाई जाती है और सजावट के लिए केसर का उपयोग किया जाता है। इस तरह इसका रंग-रूप सोने के सिक्के जैसा दिखाई देता है। मिठाई में सोने की मौजूदगी इसे खास तौर पर महंगे उपहारों की श्रेणी में रखती है।
इसका पैकेट भी अलग तरीके से तैयार किया गया है। एक डिब्बे में नौ पीस रखे जाते हैं, जिनकी कुल कीमत 9,999 रुपये है। प्रत्येक टुकड़े की कीमत 1,111 रुपये होने के कारण नौ पीस का हिसाब भी इसी आधार पर रखा गया है। संस्थापक अंजलि जैन के मुताबिक, कीमत तय करते समय 1,111 के अंक को शुभ मानने की धारणा का भी ध्यान रखा गया है।
इस मिठाई को तैयार करने का उद्देश्य केवल एक महंगा खाद्य उत्पाद पेश करना नहीं, बल्कि दीपावली के पारंपरिक उपहार को एक अलग पहचान देना भी है। पुराने समय की सोने की अशर्फियों से प्रेरित इस उत्पाद के जरिए समृद्धि और खुशहाली का संदेश देने की कोशिश की गई है। हालांकि, इसकी कीमत इसे सामान्य ग्राहकों की पहुंच से बाहर रख सकती है। इसे मुख्य रूप से उन लोगों के लिए तैयार किया गया है, जो त्योहार पर कुछ विशेष और महंगा उपहार देना चाहते हैं।
इसी आउटलेट ने मिठाई के शौकीनों के लिए ‘त्योहार नवरत्न’ नाम से काजू कतली का एक विशेष कलेक्शन भी पेश किया है। इसमें नौ अलग-अलग रंगों और स्वादों वाली काजू कतली शामिल हैं। इनका संबंध पारंपरिक नौ रत्नों के रंगों और विशेषताओं से जोड़ा गया है। पिस्ता से तैयार हरी काजू कतली को पन्ने से प्रेरित बताया गया है, जबकि केसर वाली पीली कतली को पुखराज की पहचान दी गई है।
गुलाब के स्वाद वाली कतली को मूंगे से और स्ट्रॉबेरी के स्वाद वाली लाल कतली को माणिक से प्रेरित किया गया है। इसके अलावा क्लासिक, आम, गुलाब और माचा सहित अन्य फ्लेवर भी इस कलेक्शन में शामिल हैं। इस तरह ग्राहकों को एक ही डिब्बे में अलग-अलग रंग और स्वाद वाली मिठाइयों का विकल्प मिलता है।
अंजलि जैन का दावा है कि इन मिठाइयों को तैयार करने में कृत्रिम रंगों के बजाय प्राकृतिक रंगों और स्वाद देने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके लिए पिस्ता, केसर, गुलाब, स्ट्रॉबेरी और आम जैसी चीजों का उपयोग किया गया है।

त्योहारों के दौरान मिठाइयों के बाजार में लगातार नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। पारंपरिक मिठाइयों के साथ अब अलग-अलग फ्लेवर, आकर्षक पैकिंग और विशेष सामग्री वाले उत्पाद भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। जयपुर की ‘त्योहार अशर्फी’ इसी चलन का एक उदाहरण है। हालांकि, इसे खरीदने से पहले ग्राहकों के लिए खाने योग्य सोने की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

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