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बिहार MLC चुनाव: जीत के बाद भी जदयू में खींचतान, नीरज कुमार बोले- ललन सिंह से बधाई के लिए नहीं मिलूंगा

डेस्क:बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब इसके राजनीतिक साइड इफेक्ट सामने आने लगे हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चौथी बार जीत दर्ज करने वाले जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार के ताजा बयान से पार्टी के भीतर जारी खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से मुलाकात और बधाई लेने के सवाल पर नीरज कुमार ने स्पष्ट कहा कि वह इसके लिए नहीं मिलेंगे। नीरज कुमार ने पटना स्नातक सीट पर जीत के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात की है। हालांकि, ललन सिंह से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर उनके जवाब ने पार्टी के भीतर सियासी हलचल को फिर चर्चा में ला दिया। नीरज कुमार ने कहा, “नहीं, कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। सवाल यह पैदा होता है कि पूरे चुनावी प्रकरण में मेरा क्या गुनाह है? आखिर मेरा कोई गुनाह तो होगा न, क्या गुनाह है आखिर? तो हमको क्यों चुनाव की प्रक्रिया में इतनी परेशानी झेलनी पड़ी?” उन्होंने कहा कि उन्हें अपने माता-पिता और पूर्वजों से यही सीख मिली है कि अगर किसी से कर्ज लिया जाए तो उसे लौटाना चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह राजनीति के इस कर्ज को सूद सहित लौटाएंगे। नीरज कुमार के इस बयान को चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर बने तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। पटना स्नातक सीट पर चुनाव के दौरान जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार को चुनौती का सामना करना पड़ा था।
मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन किया था। चुनाव के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया था। नीरज कुमार ने कहा कि उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं का भरपूर प्यार और समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि लोग अलग-अलग माध्यमों से उन्हें बधाई और आशीर्वाद दे रहे हैं। उनके मुताबिक, उनके आवास पर अब भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद हैं।
ललन सिंह की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर नीरज कुमार ने कहा कि अगर मुंगेर के सांसद चाहते तो सुलह की स्थिति बन सकती थी, लेकिन उन्होंने खुद सुलह की कोई कोशिश नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सुलह के पक्षधर नहीं थे।
इधर, नीरज ने अनंत सिंह से बधाई लेने पर कहा कि उनसे बधाई ले कौन रहा है, ऐसे लोगों से बधाई लेने पर तो पाप चढ़ता है। विधान परिषद चुनाव में जीत के बाद भी नीरज कुमार के इस बयान ने जदयू के भीतर चुनावी घटनाक्रम को लेकर जारी असहजता को उजागर किया है। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा है कि चुनाव के दौरान उभरे मतभेदों का पार्टी के भीतर आगे क्या असर पड़ता है।

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