डेस्क: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को कहा कि कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि यदि उसे अपने चुनावी प्रदर्शन पर भरोसा है, तो वह संसद भंग करके मतपत्रों के जरिए चुनाव का सामना करे। कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक नवंबर को दिल्ली में विशाल रैली करने की घोषणा की है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पार्टी का दावा है कि इससे विशेष रूप से अल्पसंख्यक तथा आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग प्रभावित हुए हैं। खरगे ने बेंगलुरु में संवाददाताओं से कहा, ”वोट चोरी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। कुमार ने निर्वाचन आयोग में गड़बड़ी की है। सभी दल इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनावी ”धांधली” के बारे में जागरूकता फैलाने का अपना अभियान जारी रखेगी, जिसके तहत शुक्रवार को एक प्रतीकात्मक संसद सत्र आयोजित किया जाएगा और एक नवंबर को रैली निकाली जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) रैली में हिस्सा लेगी, खरगे ने नकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा, ”हम लड़ेंगे, क्योंकि लोकतंत्र में जब तक आप लड़ेंगे नहीं, तब तक लोग जागरूक नहीं होंगे।”
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बारे में पूछे जाने पर खरगे ने कहा कि उनकी पार्टी भविष्य के सभी चुनाव मतपत्रों के जरिए कराने की मांग जारी रखेगी। इन चुनावों में मतपत्रों के इस्तेमाल के बावजूद भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने सभी चार सीटें जीत लीं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मांग छोड़ दें, क्योंकि वे (भाजपा) विधान परिषद चुनाव जीत गये हैं।
एक समय ऐसा भी था, जब उसने (भाजपा ने) लोकसभा की केवल दो सीटें जीती थीं, (तब चुनाव मतपत्रों के जरिए होते थे)।” खरगे ने भाजपा को चुनावी नतीजों को लेकर आत्मसंतुष्ट होने के प्रति आगाह किया और कहा, ”कभी-कभी ऐसा होता है (जब भाजपा मतपत्रों के जरिए हुए चुनाव जीतती है)। इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी (भाजपा) का निर्वाचन आयोग पर कोई प्रभाव नहीं है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा को अपने प्रदर्शन को लेकर अहंकार नहीं पालना चाहिए। खरगे ने कहा, ”ठीक है, अगर ऐसा है तो वे संसद भंग कर दें और मतपत्रों के जरिए चुनाव में उतरें।” विधान परिषद की चार रिक्त सीटों के लिए हुए चुनाव में जनता दल (सेक्युलर) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी सीटें बरकरार रखीं।


