डेस्क: केरल उच्च न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह चेरानल्लूर में एक कार दुर्घटना में एक स्कूटर चालक की मौत के सिलसिले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को गिरफ्तार न करे। इस हादसे में न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे की कार की चपेट में आने से स्कूटर सवार की मौत हो गई थी। न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागाथ ने संबंधित न्यायाधीश की अग्रिम जमानत अर्जी पर उनके वकील एवं केरल सरकार के वकील की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।
उच्च न्यायालय ने न्यायाधीश को जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया। हादसे में जिस व्यक्ति की जान गई उसके परिवार ने मामले में पक्षकार बनने के लिए एक याचिका दायर की है, जिस पर अदालत बाद में विचार करेगी। यह मामला रविवार तड़के हुए एक हादसे से जुड़ा है, जब चेरानल्लूर के साउथ चित्तूर निवासी जयबालकृष्णन (55) को मारापरम्बु के पास कंटेनर रोड पर एक तेज रफ्तार मर्सिडीज़-बेंज कार ने टक्कर मार दी। यह कार एक न्यायाधीश के नाम पर पंजीकृत थी।
पुलिस के अनुसार सड़क किनारे ढाबा चलाने वाला जयबालकृष्णन अपने स्कूटर से घर लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। पुलिस ने शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) (लापरवाही से मौत का कारण बनना) के तहत मामला दर्ज किया और रविवार शाम को नाबालिग को थाने से ही जमानत पर छोड़ दिया। इस कदम के बाद चेरानल्लूर थाने के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए।
जयबालकृष्णन के बेटे और बेटी ने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रदर्शन करते हुए मांग की कि आरोपी को गिरफ्तार किया जाए और उसे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाए। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने BNS की धारा 105 लगाई, जो ‘गैर-इरादतन हत्या’ से संबंधित है। लेकिन बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग को जमानत दे दी। पुलिस ने इस मामले में उसके पिता को आरोपी बनाया। पुलिस ने बताया कि बुधवार को न्यायाधीश से पूछताछ की गई तथ बृहस्पतिवार दोपहर को उनसे और पूछताछ की जानी है।


