डेस्क: पंजाब से दुबई जाकर ट्रक चलाने वाले 53 वर्षीय कुलवंत सिंह की किस्मत चमक गई है। उन्होंने अबू धाबी की मशहूर बिग टिकट लॉटरी में 5 लाख दिरहम का पुरस्कार जीता है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत करीब 1.3 करोड़ रुपए बताई गई है। कुलवंत सिंह पिछले 18 वर्षों से दुबई के जेबेल अली इलाके में रहकर काम कर रहे हैं। अब वह इस रकम का इस्तेमाल अपने परिवार की मदद करने और घर से जुड़ी जरूरतें पूरी करने के लिए करना चाहते हैं। ‘गल्फ न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, कुलवंत सिंह ने लॉटरी के बारे में पहली बार इंटरनेट पर वीडियो देखा था। इसके बाद उन्होंने भी किस्मत आजमाने का फैसला किया।
इस बार उन्होंने बिना किसी खास गणना के अपनी पसंद से एक टिकट चुना । उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यही टिकट उन्हें इतनी बड़ी रकम दिला देगा। कुलवंत सिंह अकेले लॉटरी में हिस्सा नहीं लेते थे। वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर हर महीने टिकट खरीदते थे। उनका समूह करीब दो वर्षों से लगातार किस्मत आजमा रहा था। आखिरकार अबू धाबी बिग टिकट की सीरीज 291 में उनकी कोशिश रंग लाई। कुलवंत सिंह ने जीत की खबर मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका टिकट जीत गया है, तो वह बेहद खुश हुए।
उन्होंने बताया कि वे हर महीने मिलकर टिकट खरीदते थे और इस बार जीत की खबर मिलना उनके लिए शानदार अनुभव रहा। करोड़ों रुपये का पुरस्कार जीतने के बाद कुलवंत सिंह की प्राथमिकता अपने परिवार की आर्थिक मदद करना है। उन्होंने कहा कि वह इस रकम का इस्तेमाल अपने परिवार और घर के लिए करना चाहते हैं। विदेश में करीब 18 साल तक काम करने के बाद मिली यह रकम उनके लिए परिवार की जरूरतें पूरी करने और भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर है। कुलवंत सिंह ने यह भी बताया कि वह और उनके दोस्त आगे भी लॉटरी में हिस्सा लेते रहेंगे।
केरल के इंजीनियर ने भी जीते 26 लाख रुपए
इस लॉटरी में दूसरे भारतीय विजेताओं को भी पुरस्कार मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, पांच भारतीय प्रवासियों ने मिलकर सांत्वना पुरस्कारों के रूप में कुल 19.5 लाख दिरहम जीते। केरल के 30 वर्षीय इंजीनियर मोहम्मद इजास सी ने भी 1 लाख दिरहम का पुरस्कार जीता, जिसकी कीमत करीब 26 लाख रुपये बताई गई है। उन्होंने अपने बेटे की जन्मतिथि और जन्मवर्ष से जुड़ी संख्या चुनी थी। इजास ने कहा कि जीत उनके लिए बेहद खास पल था, क्योंकि उन्होंने टिकट के लिए अपने बेटे के जन्मदिन से जुड़ी संख्या चुनी थी। जीत की खबर मिलने से यह अनुभव उनके लिए और भी यादगार बन गया।


