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नवंबर में किस तारीख को है धनतेरस, जानिए  सोना-चांदी खरीदने का सटीक समय?

डेस्क: धनतेरस जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दिवाली के पांच दिनों के त्योहार का पहला दिन है। धनत्रयोदशी के दिन ही समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी सागर से प्रकट हुई थीं। इसलिए त्रयोदशी के इस शुभ दिन पर देवी लक्ष्मी और धन के देवता भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। इस साल धनतेरस शुक्रवार 6 नवंबर 2026 को है। पूजा का सबसे अच्छा समय प्रदोष काल है: शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे IST (दिल्ली) तक। धनतेरस के दिन आप सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दिन भर किसी भी समय खरीदारी कर सकते हैं।

प्रदोष काल में होती है पूजा
धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय प्रदोष काल है, जब ‘स्थिर लग्न’ चल रहा हो। ‘स्थिर’ का अर्थ है अचल या जो बदलता नहीं है। अगर स्थिर लग्न में धनतेरस की पूजा की जाए, तो लक्ष्मी जी आपके घर में वास करती हैं, इसलिए धनतेरस पूजा के लिए यह समय सबसे अच्छा है। ‘वृषभ लग्न’ को स्थिर माना जाता है और दिवाली के त्योहार के दौरान यह ज़्यादातर प्रदोष काल के समय ही होता है।  इस दिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, चांदी के सिक्के, पीतल का सामान और नए बर्तन खरीदे जात हैं। साथ ही नकारात्मकता और दुर्भाग्य से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमदीपदान किया जाता है।

पूजा की सही टाइमिंग
2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। नई दिल्ली के लिए हिंदू पंचांग के समय के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:47 बजे समाप्त होगी। नई दिल्ली के लिए आमतौर पर बताया जाने वाला धनतेरस पूजा मुहूर्त शाम 6:02 बजे से शाम 7:57 बजे तक है। समय अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकता है, इसलिए लोगों को पूजा की योजना पक्की करने से पहले अपने शहर का पंचांग देख लेना चाहिए।

धनतेरस पर क्या खरीदें
धनतेरस की खरीदारी में आम तौर पर ऐसी चीज़ों पर ध्यान दिया जाता है जो खुशहाली, सुरक्षा और नई शुरुआत का प्रतीक हों। धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदना सबसे लोकप्रिय परंपराओं में से एक है। लंबे समय तक रहने वाली खुशहाली के प्रतीक के तौर पर अक्सर गहने, चांदी के सिक्के और चांदी की छोटी-छोटी चीज़ें खरीदी जाती हैं। धनतेरस पर नए बर्तन खरीदना भी एक आम रिवाज है। पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन न सिर्फ़ त्योहार के लिहाज़ से अहम होते हैं, बल्कि इन्हें साल भर इस्तेमाल भी किया जा सकता है। कई घरों में खाली बर्तन घर के अंदर नहीं लाया जाता; इसके बजाय, घर में प्रवेश करने से पहले उसमें चावल, पानी, मिठाई या घर की कोई अन्य चीज़ रखी जाती है।

दीये और पूजा का सामान
मिट्टी के पारंपरिक दीये सस्ती और सार्थक खरीदारी हैं। दिवाली नजदीक आने पर ये बहुत काम आते हैं और इन्हें घर के दरवाज़ों, बालकनी, पूजा घर और खिड़कियों पर सजाया जा सकता है। इस मौके के लिए पूजा की नई थाली, अगरबत्ती स्टैंड, दीया स्टैंड या सजावटी आध्यात्मिक चीज़ें भी खरीदी जा सकती हैं। जो परिवार त्योहार के लिए खास कोना सजाते हैं, वे अक्सर दिवाली पूजा का सामान और सजावट की चीज़ें एक ही जगह से खरीदते हैं ताकि पूजा के शुभ मुहूर्त से पहले सारी ज़रूरी चीज़ें तैयार रहें। दिवाली से पहले अक्सर लक्ष्मी-गणेश जी की छोटी मूर्तियां खरीदी जाती हैं। इन्हें घर में त्योहार की पूजा की व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है और दूसरों को तोहफ़े के तौर पर भी दिया जा सकता है।

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