डेस्क: मैग्नीशियम शरीर के लिए जरूरी खनिजों में से एक है। यह मांसपेशियों और नसों के सामान्य कामकाज, रक्त शर्करा और रक्तचाप को नियंत्रित करने के साथ-साथ हड्डियों, प्रोटीन और डीएनए से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में इसकी कमी होने पर शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं, इसलिए कई बार लोग उन्हें सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि हर महिला में थकान, सिरदर्द या मांसपेशियों में ऐंठन का मतलब मैग्नीशियम की कमी नहीं होता। अगर ऐसे लक्षण लगातार बने हुए हैं या बढ़ रहे हैं, तो सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
महिलाओं में मैग्नीशियम की जरूरत क्यों महत्वपूर्ण है
महिलाओं के लिए रोजाना मैग्नीशियम की जरूरत उम्र और जीवन की अवस्था के अनुसार बदलती है। वयस्क महिलाओं के लिए सामान्य रूप से करीब 310-320 मिलीग्राम प्रतिदिन की जरूरत होती है। गर्भावस्था के दौरान यह जरूरत बढ़कर लगभग 350-360 मिलीग्राम तक हो जाती है। खान-पान में पोषक तत्वों की कमी, कुछ स्वास्थ्य समस्याएं और कुछ दवाएं शरीर में मैग्नीशियम का स्तर कम कर सकती हैं। लंबे समय तक दस्त या आंतों से जुड़ी समस्याएं, टाइप-2 मधुमेह और कुछ अन्य स्थितियों में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।
बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन
मैग्नीशियम की कमी के संभावित संकेतों में मांसपेशियों में ऐंठन और अनैच्छिक खिंचाव शामिल हैं। अगर रात में अचानक पैरों की मांसपेशियां खिंचने लगती हैं या बार-बार ऐंठन होती है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मैग्नीशियम की कमी भी एक कारण हो सकती है। लेकिन सिर्फ ऐंठन के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि शरीर में मैग्नीशियम कम है। पानी की कमी, ज्यादा व्यायाम और दूसरी पोषक तत्वों की कमी भी इसकी वजह हो सकती है।
लगातार थकान और कमजोरी
अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी शरीर में लगातार कमजोरी या थकान महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मैग्नीशियम शरीर की ऊर्जा से जुड़ी कई जैविक प्रक्रियाओं में हिस्सा लेता है और इसकी कमी में थकान व कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, लगातार थकान के पीछे खून की कमी, थायरॉयड, नींद की समस्या, तनाव या दूसरी स्वास्थ्य स्थितियां भी हो सकती हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर जांच कराना बेहतर रहता है।
मैग्नीशियम की गंभीर कमी बढ़ने पर हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। बहुत ज्यादा कमी की स्थिति में मांसपेशियों में तेज खिंचाव, दौरे और दिल की धड़कन के असामान्य होने जैसी गंभीर समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे लक्षणों को केवल विटामिन या खनिज की कमी मानकर खुद से सप्लीमेंट लेना ठीक नहीं है। खासकर अगर दिल की धड़कन असामान्य लगे या मांसपेशियों में तेज खिंचाव हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
सिरदर्द और माइग्रेन की समस्या
मैग्नीशियम और माइग्रेन के बीच संबंध को लेकर शोध हुआ है। कुछ अध्ययनों में माइग्रेन से पीड़ित लोगों में मैग्नीशियम का स्तर कम पाया गया है और कुछ शोधों में मैग्नीशियम लेने से माइग्रेन की आवृत्ति में मामूली कमी देखी गई है। हालांकि, इसके लिए सप्लीमेंट लेना डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। अगर आपको बार-बार सिरदर्द, माइग्रेन या सिरदर्द के साथ रोशनी और आवाज से परेशानी होती है, तो केवल मैग्नीशियम की कमी मानने के बजाय इसके दूसरे कारणों की भी जांच जरूरी है।
चिड़चिड़ापन और मूड में बदलाव
मैग्नीशियम शरीर के तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में भूमिका निभाता है। इसकी कमी बढ़ने पर कुछ लोगों में मानसिक और व्यवहार से जुड़े बदलाव भी देखे जा सकते हैं। NIH के अनुसार गंभीर कमी में व्यक्तित्व या मानसिक स्थिति में बदलाव हो सकते हैं। हालांकि, चिड़चिड़ापन, बेचैनी या मूड में बदलाव को सीधे मैग्नीशियम की कमी से जोड़ना सही नहीं होगा। तनाव, नींद की कमी, हार्मोनल बदलाव और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके कारण हो सकती हैं।
नींद से जुड़ी परेशानी को भी नजरअंदाज न करें
नींद की समस्या को अक्सर तनाव या दिनभर की थकान से जोड़ दिया जाता है। मैग्नीशियम शरीर के तंत्रिका और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में जरूर भूमिका निभाता है, लेकिन सिर्फ नींद खराब होने के आधार पर मैग्नीशियम की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती। अगर लंबे समय से नींद आने में परेशानी है या बार-बार नींद टूटती है, तो इसके पीछे तनाव, कैफीन, नींद की आदतों या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या को भी देखा जाना चाहिए।
पीएमएस के दौरान परेशानी बढ़ना
पीरियड्स से पहले पेट में दर्द, ऐंठन, थकान और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं कई महिलाओं को होती हैं। मैग्नीशियम मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण है, इसलिए पर्याप्त मात्रा लेना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि पीएमएस के हर लक्षण की वजह मैग्नीशियम की कमी है। अगर हर महीने दर्द या दूसरे लक्षण बहुत ज्यादा होते हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
मैग्नीशियम की कमी से बचने के लिए क्या खाएं
मैग्नीशियम के लिए सबसे पहले भोजन पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, बीज, मेवे, साबुत अनाज, दूध और दही जैसे खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्रोत हैं। बिना जांच या डॉक्टर की सलाह के मैग्नीशियम की गोलियां शुरू करना सही नहीं है। सप्लीमेंट की ज्यादा मात्रा से दस्त, मतली और पेट में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वयस्कों में सप्लीमेंट और दवाओं से मिलने वाले मैग्नीशियम की ऊपरी सीमा सामान्य रूप से 350 मिलीग्राम प्रतिदिन है, हालांकि डॉक्टर किसी खास स्थिति में अलग सलाह दे सकते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
अगर लगातार कमजोरी, बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन, हाथ-पैर में झनझनाहट, असामान्य दिल की धड़कन या अन्य लक्षण बने हुए हैं, तो खुद से मैग्नीशियम की दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आपकी स्थिति, खान-पान, दवाओं और अन्य कारणों को देखकर जांच की सलाह दे सकते हैं।
ध्यान रखें: शरीर में मैग्नीशियम का संतुलन जरूरी है, लेकिन हर लक्षण को इसकी कमी मान लेना सही नहीं है। सही कारण पता करना और जरूरत के अनुसार उपचार लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।


