डेस्क: गुजरात में कारोबारियों के एक वर्ग ने 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) के विरोध में शुक्रवार को ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। कारोबारियों का कहना है कि इससे छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एन.पी.सी.आई.) ने 15 अक्टूबर से कारोबारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपए से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू किया है। वहीं, 75,000 रुपए या इससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपए होगा। यह शुल्क कारोबारी को देना होगा जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति लेनदेन और छोटे भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है।
विरोध में शामिल कारोबारियों ने अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड मशीन, साउंड बॉक्स और भुगतान स्कैनर को काले कपड़े से ढक दिया तथा ‘सॉरी, नो यूपीआई टुडे’ के पोस्टर लगाए। आठ सौ से अधिक व्यापारी संगठनों वाले गुजरात ट्रेडर्स फेडरेशन के अध्यक्ष जेयेंद्र तन्ना ने कहा कि राज्यभर में विरोध को मिली प्रतिक्रिया मिली-जुली रही, हालांकि कई क्षेत्रों में कारोबारियों ने इसमें सकारात्मक भागीदारी की।
उन्होंने कहा, ”कुछ क्षेत्रों में प्रतिक्रिया अच्छी रही, जहां व्यापारी संघ से जुड़े दुकानदार हैं। अन्य क्षेत्रों में यह उतना सफल नहीं रहा। हमने सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचने के लिए यूपीआई का इस्तेमाल रोक दिया। गुजरात में 800 संघों ने इसमें हिस्सा लिया और बड़ी संख्या में सदस्य इसमें शामिल हुए।” राजकोट के एक व्यापारी ने कहा कि एमडीआर लगाने का फैसला कारोबार और आम लोगों के हित में नहीं होगा, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ेगी और बाजार की गतिविधियां धीमी होंगी।
उन्होंने कहा, ”हमारे 50 प्रतिशत भुगतान यूपीआई के जरिये होते हैं। हम सरकार से या तो यूपीआई बंद करने या इन शुल्कों को वापस लेने का आग्रह करते हैं।” अखिल भारतीय मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन की गुजरात इकाई के अध्यक्ष निकुंज पटेल ने कहा कि उनके संगठन ने केंद्रीय स्तर पर विरोध वापस लेने के फैसले का पालन किया। उन्होंने कहा, ”मोबाइल कारोबारियों ने विरोध में हिस्सा नहीं लिया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हमें आश्वासन दिया है कि बातचीत के जरिये हमारी मांगों पर विचार किया जाएगा। इसलिए हमने बंद नहीं रखा।”


