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Petrol Diesel Price: कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता

डेस्क: कच्चे तेल (Crude oil)की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी देखने को मिली है और अंतरराष्ट्रीय बाजार(International market) में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude)एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। 2 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमत 102.61 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 93.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने कच्चे तेल के बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है हालांकि घरेलू स्तर पर कीमतों में बदलाव कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।
फिलहाल भारतीय वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि 2 अक्टूबर को देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 112.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में आखिरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मई 2026 में बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा तेजी पर घरेलू बाजार की नजर बनी हुई है।
दरअसल मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव तेल बाजार के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अमेरिका की ओर से क्षेत्र में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप भेजने पर विचार किए जाने की खबरों के बीच बाजार में सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। अगर सैन्य तनाव और बढ़ता है और प्रमुख तेल मार्गों से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर और दबाव आ सकता है।
सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से गुजर रहे एक टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की सूचना के बाद तनाव और बढ़ गया है। फिलहाल घटना से हुए नुकसान की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन इस तरह की घटनाएं वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकती हैं। यदि इस मार्ग से तेल की सप्लाई में बड़ा व्यवधान आता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका या यूरोप ही नहीं बल्कि भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।

ईरान से होने वाले तेल निर्यात को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में ईरान ने टैंकरों पर लगभग कोई कच्चा तेल लोड नहीं किया। इसे अमेरिकी दबाव और क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच ईरान की वैश्विक ऊर्जा बाजार तक पहुंच प्रभावित होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि हाल में मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में कुछ सुधार के संकेत मिले थे लेकिन सैन्य तनाव बढ़ने से बाजार में दोबारा अस्थिरता पैदा हो गई है।

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों का प्रभाव सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहता बल्कि माल ढुलाई परिवहन और कई वस्तुओं की लागत पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों में वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंची रहती हैं और भारतीय तेल कंपनियां आगे क्या फैसला करती हैं।

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