दरभंगा

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय द्वारा ‘गांधी जयंती समारोह’ आयोजित

दरभंगा:विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में शीघ्र स्थापित होगा गांधी चेयर, कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी ने की घोषणा माता जानकी की धरती मिथिला धन्य है, जहां गांधी जी चार बार आए थे। यहां के महाराजाओं से गांधी जी का व्यक्तिगत एवं धनिष्ठ संबंध था। गांधी जी जितने सरल एवं सहज दिखते हैं, उनके व्यक्तित्व का विश्लेषण उतना ही बृहत् और कठिन है। गांधी जी विदेश में कानून की पढ़ाई के साथ ही क्रांतिकारी बने और दक्षिण अफ्रीका में उनके प्रयोग प्रारंभ हुए, जिसके बाद वे निरंतर प्रयोग करते रहे और आत्मालोचन से आगे बढ़ते रहे। प्रौढ़ावस्था आते-आते उन्होंने कहा कि मेरा जीवन ही मेरा संदेश है। उक्त बातें तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से सेवानिवृत प्राध्यापक प्रो पवन कुमार सिंह ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के तत्त्वावधान में महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर जुबिली हॉल में कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित ”गांधी जयंती समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री को नमन करते हुए कहा कि गांधी जी की प्रासंगिकता सदा बनी हुई है। वे आधुनिकता के विरोधी नहीं थे, परंतु मानव की गरिमा एवं मनुष्यता के पक्षधर थे। वे समय के बड़े पाबंद तथा अहिंसा एवं सत्य के पलक थे।

कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में शीघ्र ही गांधी चेयर की स्थापना की घोषणा करते हुए कहा कि गांधी के व्यक्तित्व की चर्चा एक-दो घंटे में संभव नहीं है। गांधी जी युवावस्था तक सूट, बूट, टाई में रहते थे, पर बाद में अपने आप को काफी बदला। कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए खुद को दर्पण बनाना पड़ता है। गांधी के विचार पूर्व में सही था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। कुलपति ने गांधी जी को राष्ट्र का ध्रुवतारा बताते हुए कहा कि गांधी जी के इंसानियत के विचार को कभी दबाया नहीं जा सकता है। यदि उनके एक विचार को भी हम पूरा करें तो बड़ी बात होगी। कुलपति ने गांधी को अपना आईकॉन बताते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 के निर्माण हेतु महात्मा गांधी के विचारों को लेकर ही आगे बढ़ना होगा।

विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो मुनेश्वर यादव ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि गांधी जी 21वीं सदी का उद्घोषणा पत्र एवं पूरी मानवता के लिए जरूरी हैं। वे अपने जीवन में अफ्रीका, यूरोप एवं एशिया महादेश को प्रभावित किया था और आज पूरे विश्व को रास्ता दिखा रहे हैं। कहा कि मार्क्सवाद से बाइलेंस हटा देना ही गांधीवाद है। गांधी जी ने कहा था कि कर्तव्य के हिमालय से ही अधिकार की गंगा निकलती है।

दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो हरे कृष्ण सिंह स्वागत कर्ता, उपनिदेशक डॉ विवेक कुमार राय धन्यवाद कर्ता तथा बीएड (नियमित) के संगीत-शिक्षक अक्षय शर्मा ने संचालक के रूप में रूप में अपना विचार व्यक्त किया।

संगोष्ठी से पूर्व कुलपति के नेतृत्व में अतिथियों, शिक्षकों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों आदि ने महात्मा गांधी सदन जाकर गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय कुलगीत बीएड के छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत किया। छात्र-छात्राओं ने गांधी जी के अनेक प्रिय भजनों को प्रस्तुत किया, वहीं गांधी जीवन पर आधारित मुक अभिनय भी प्रस्तुत किया गया। समारोह में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित ऑन स्पॉट निबंध प्रतियोगिता में सफल तनुश्री-प्रथम, श्वेता कुमारी-द्वितीय तथा रघुनंदन कुमार एवं सौम्य सुगंध को तृतीय स्थान के लिए, जबकि गुड्डू कुमार निधि कुमारी, शांभवी कुमारी, गौरव कुमार, महाचन्द्र ठाकुर, साक्षी कुमारी एवं शिवानी कुमारी को सांत्वना हेतु प्रमाण पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं भाषण प्रतियोगिता में शामिल सभी छात्राओं एवं एनएसएस के 50 से अधिक स्वयंसेवकों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। अतिथियों का स्वागत पाग, चादर, मोमेंटो एवं तुलसी पौधा से किया गया। समापन बिहारगीत से हुआ।

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