डेस्क: वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) की बिकवाली और महंगे आयात के बीच भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। रुपया गिरकर 96 के स्तर तक पहुंच चुका है और कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी (Anindya Banerjee) के मुताबिक, निकट भविष्य में 97 का स्तर भी देखने को मिल सकता है।
बनर्जी ने चेतावनी दी है कि अगर रुपया 97 के स्तर को भी पार कर नीचे जाता है, तो यह 99 तक पहुंच सकता है। उनके मुताबिक इस स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार में रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है, जिसका असर महंगाई पर भी दिखाई देने की आशंका है।
कई मोर्चों पर रुपये पर दबाव
अनिंद्य बनर्जी के अनुसार रुपये की कमजोरी के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है, वहीं आयात महंगा होने से डॉलर की मांग पर भी असर पड़ा है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड ऊंचे स्तर पर पहुंचना भी रुपये के लिए चुनौती बढ़ा रहा है। हालांकि, बनर्जी का कहना है कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां रुपये के लिए मुश्किल पैदा कर रही हैं।
इस महीने विदेशी निवेशकों ने 6.1 अरब डॉलर के शेयर बेचे
रुपये पर दबाव बढ़ाने वाला एक बड़ा कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली भी है। इस महीने अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से करीब 6.1 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। बनर्जी के मुताबिक, पिछले दो महीनों के दौरान भारतीय बाजार में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है। इससे डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर दबाव बने रहने की स्थिति पैदा हुई है।
FCNR(B) से आया पैसा, लेकिन रुपये को तुरंत राहत नहीं
रुपये को सहारा देने के लिए FCNR(B) के जरिए भी विदेशी मुद्रा आई है, लेकिन इसका तत्काल असर रुपये पर नजर नहीं आया। विशेषज्ञ के मुताबिक इस रकम का बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में आने के बजाय भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा भंडार में चला गया। ऐसे में यदि रुपये पर दबाव आगे और बढ़ता है, तो बाजार में RBI के हस्तक्षेप की संभावना भी बन सकती है।
97 का स्तर अहम, टूटने पर 99 तक जाने की आशंका
बनर्जी के मुताबिक रुपये की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 97 का स्तर महत्वपूर्ण है। अगर रुपया इस स्तर से भी नीचे जाता है, तो कमजोरी और बढ़ सकती है और 99 का स्तर भी देखने को मिल सकता है। उनका मानना है कि रुपये की कमजोरी लंबे समय तक बनी रहने पर इसका असर बाजार की धारणा के साथ-साथ महंगाई पर भी पड़ सकता है।
कच्चे तेल ने बढ़ाया आयात का बोझ
रुपये की मुश्किल बढ़ाने में कच्चे तेल की कीमतों की भी भूमिका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्रूड महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग बढ़ती है।
बनर्जी के अनुसार सिर्फ ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ही नहीं, बल्कि स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। डीजल और एविएशन फ्यूल की ऊंची कीमतें भी इसी दबाव का हिस्सा हैं।
महंगाई पर नजर, RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट
अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक इस बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, उनका कहना है कि RBI का फैसला केवल वैश्विक सेंटिमेंट या अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति को देखकर नहीं होगा, बल्कि घरेलू महंगाई के दबाव को ध्यान में रखकर भी किया जा सकता है। यानी रुपये की कमजोरी, महंगे कच्चे तेल और बढ़ती आयात लागत के बीच आने वाले समय में महंगाई और ब्याज दरों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।


