डेस्क: वजन कम करने के लिए कैलोरी घटाने वाली डाइट काफी लोकप्रिय है, लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। शोध के मुताबिक, ऐसी डाइट से शुरुआत में वजन और कमर का घेरा कम हो सकता है, लेकिन वजन घटाने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। कई लोगों में कुछ समय बाद घटा हुआ वजन फिर बढ़ सकता है। यह विश्लेषण यूनिवर्सिटी ऑफ वोलोंगोंग की यास्मीन प्रोब्स्ट और ओलीविया विल्स ने द कन्वरसेशन में प्रकाशित किया है।
कैसे काम करती है कम कैलोरी डाइट
कैलोरी कम करने वाली डाइट में व्यक्ति भोजन से मिलने वाली ऊर्जा की मात्रा घटाता है। जब शरीर को उसकी जरूरत से कम ऊर्जा मिलती है, तो वह जमा वसा का इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है। इससे समय के साथ वजन कम हो सकता है। इस तरह की डाइट में इंटरमिटेंट फास्टिंग, अल्टरनेट डे फास्टिंग और फास्ट 800 जैसी पद्धतियां शामिल हैं। कुछ योजनाओं में रोजाना करीब 500 से 600 कैलोरी कम लेने की सलाह दी जाती है, जबकि बहुत कम कैलोरी वाली डाइट में पूरे दिन 800 से कम कैलोरी लेने को कहा जाता है।
डॉक्टर की निगरानी में लें डाइट
विशेषज्ञों के अनुसार, बहुत कम कैलोरी वाली डाइट हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती। कुछ विशेष परिस्थितियों में, जैसे किसी सर्जरी से पहले तेजी से वजन कम करने के लिए, डॉक्टर ऐसी डाइट की सलाह दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है ताकि शरीर को पर्याप्त विटामिन, खनिज और अन्य आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें।विभिन्न शोधों में पाया गया है कि कैलोरी कम करने वाली डाइट से वजन और कमर का घेरा घट सकता है। अधिक वजन, मोटापे या टाइप-2 मधुमेह से जूझ रहे कुछ लोगों में वजन कम होने से रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी सुधार हो सकता है। इससे हृदय रोग से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उपलब्ध कई अध्ययनों की अवधि केवल कुछ सप्ताह से लेकर करीब 12 सप्ताह तक रही है। इसलिए लंबे समय तक वजन बनाए रखने के सवाल पर तस्वीर अलग हो सकती है।
सबसे बड़ी परेशानी
वजन कम होने के साथ शरीर में कई बदलाव होते हैं। भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन में बदलाव हो सकता है, जिससे व्यक्ति को अधिक भूख महसूस हो सकती है। वहीं, वजन कम होने के बाद शरीर पहले की तुलना में कम ऊर्जा खर्च करने लग सकता है। इस कारण वजन घटने की गति धीमी पड़ सकती है या कुछ समय के लिए वजन एक स्तर पर रुक सकता है। इसे सोशल मीडिया पर प्रचलित ‘स्टारवेशन मोड’ कहकर समझना सही नहीं है। वजन घटने के बाद शरीर में ऊर्जा खर्च और भूख से जुड़े बदलाव होना अलग प्रक्रिया है। कैलोरी सीमित करने वाली डाइट में लगातार भूख लगना कई लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन सकता है। इससे डाइट का पालन करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, मूड, नींद और भोजन के साथ व्यक्ति के संबंध पर भी असर पड़ सकता है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के भूख में अचानक बदलाव आए और उसके साथ चक्कर, अत्यधिक थकान या ध्यान लगाने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
किन लोगों के लिए खतरा
कैलोरी कम करने वाली डाइट कुछ अधिक वजन वाले या मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। टाइप-2 मधुमेह या गठिया जैसी कुछ स्थितियों में भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार वजन कम करना लाभकारी हो सकता है। लेकिन गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं, बच्चों और किशोरों के लिए बिना विशेषज्ञ निगरानी ऐसी डाइट उचित नहीं मानी जाती। खाने से जुड़े विकारों से जूझ रहे लोगों को भी ऐसी डाइट अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर लोगों के लिए केवल तेजी से कैलोरी कम करने के बजाय पूरे आहार और जीवनशैली में लंबे समय तक टिकने वाले बदलाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। नमक, अतिरिक्त चीनी और अधिक वसा वाले भोजन को सीमित करना, शराब का सेवन कम करना, भोजन की मात्रा पर नियंत्रण रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है। इसके साथ पहले से भोजन की योजना बनाना और भूख तथा पेट भरने के संकेतों पर ध्यान देना भी उपयोगी हो सकता है।
ऐसे भोजन पर दें ध्यान
आहार विशेषज्ञ पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर वाले भोजन को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। सब्जियां, दालें और साबुत अनाज इसके अच्छे स्रोत हो सकते हैं। कैलोरी सीमित करने वाली कोई भी डाइट शुरू करने से पहले मान्यता प्राप्त आहार विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है। व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, गतिविधि और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार बनाई गई योजना वजन घटाने के साथ उसे लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकती है।


