डेस्क: बिहार की राजधानी पटना के सरकारी स्कूलों में संसाधनों, बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों की संख्या को लेकर दो बेहद विरोधाभासी तस्वीरें सामने आई हैं। शहर के गर्दनीबाग और महावीर नगर स्थित दो सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान एक तरफ जहां कमरों की भारी कमी के कारण एक ही कमरे में कई कक्षाएं चलती दिखीं, वहीं दूसरी तरफ पर्याप्त कमरे और शिक्षक होने के बावजूद बच्चे नदारद नजर आए।
गर्दनीबाग का हाल: 2 कमरों में 80 बच्चे, 1 शिक्षक और 2 ब्लैकबोर्ड
गर्दनीबाग स्थित प्राथमिक विद्यालय में कुल 80 बच्चों का नामांकन है, लेकिन पूरा स्कूल महज दो कमरों में सिमटा हुआ है।
कमरा नंबर 1: इस कमरे में कक्षा 1, 2 और 3 के बच्चे एक साथ बैठते हैं। पढ़ाई के लिए एक ही कमरे में विपरीत दिशाओं में दो अलग-अलग ब्लैकबोर्ड लगाए गए हैं। शिक्षक पहले एक ब्लैकबोर्ड पर कक्षा 1 व 2 के बच्चों को पढ़ाकर काम सौंपते हैं और फिर घूमकर दूसरे ब्लैकबोर्ड पर कक्षा 3 के बच्चों को पढ़ाते हैं।
कमरा नंबर 2: दूसरे कमरे में कक्षा 4 और 5 के बच्चों को बेंच की अलग-अलग कतारों में विपरीत दिशा में बैठाकर इसी तरह एक साथ पढ़ाया जाता है। इस प्रकार केवल दो कमरों में ही पांचों प्राथमिक कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
टूट कर गिर रही छत, बारिश में टपकता है पानी
गर्दनीबाग के इस स्कूल में सिर्फ जगह की कमी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी बड़ा खतरा बना हुआ है। दोनों कमरों की सीलिंग टूट रही है और कभी-कभी छत का हिस्सा नीचे आ गिरता है। बारिश के दौरान कमरों में पानी टपकता है, जिससे मासूम बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महावीर नगर में उलटी तस्वीर: 5 शिक्षक, 45 बच्चे और कई क्लासरूम खाली
दूसरी ओर, महावीर नगर स्थित सरकारी स्कूल में स्थिति बिल्कुल अलग पाई गई। यहाँ शिक्षकों या कमरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम है। स्कूल में कुल 5 शिक्षक तैनात हैं और केवल 45 बच्चे नामांकित हैं, यानी औसतन एक शिक्षक पर मात्र 9 बच्चे आते हैं। अलग-अलग कक्षाओं में बच्चों की संख्या इतनी कम है कि किसी कक्षा में 4 तो किसी में 5 बच्चे ही मौजूद थे। स्कूल का एक कमरा प्रिंसिपल के कार्यालय के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। जब मिड-डे मील के लिए घंटी बजी तो पूरे स्कूल में कुल मिलाकर महज 25 बच्चे ही दिखाई दिए।
झुग्गियों का हटना और परिवारों का पलायन बनी मुख्य वजह
तालीम मरकज से जुड़ी कार्यकर्ता के अनुसार, महावीर नगर स्कूल के आसपास झुग्गी-झोपड़ियों की संख्या काफी कम है। इसके अलावा, जब पुलिस द्वारा झुग्गी बस्तियों को हटाया जाता है, तो वहां रहने वाले गरीब परिवार दूसरी जगह पलायन कर जाते हैं, जिसका सीधा असर स्कूल में बच्चों की संख्या और नामांकन पर पड़ता है।


