शिविर में ‘जल-जीवन-हरियाली’, सर्पदंश-प्रबंधन, सुरक्षित नौकायन, जल-स्वच्छता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का हुआ सफल आयोजन
दरभंगा:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग के द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से विश्वविद्यालय परिसर में दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर जिलों के 200 स्वयंसेवकों का सात दिवसीय “युवा आपदा मित्र आवासीय प्रशिक्षण शिविर” छठे दिन जारी रहा, जिसमें संयोजक डॉ आर एन चौरसिया, डॉ दिलीप कुमार झा, एसडीआरएफ प्रशिक्षक- रूपेश कुमार पासवान, राजू कुमार, संतोष कुमार, पूजा कुमारी, प्रीति कुमारी, प्रभु कुमार, सच्चिदानंद कुमार, मिथिलेश तिवारी, वरीय स्वयंसेवक- अक्षय कुमार झा, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अंकिता, प्रशांत, विकास, सुमित, अमित, रवीन्द्र, संजय के साथ ही दरभंगा सदर अस्पताल की टीम, अग्निशमन दल, बिहार पुलिस एवं विश्वविद्यालय गार्ड आदि ने सक्रिय सहयोग किया। प्रातः काल में वैभव झा के दिशा-निर्देश में स्वयंसेवकों को पीटी, योग एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। आज के तकनीकी सत्र का प्रारंभ राष्ट्र-गीत एवं एनएसएस के लक्ष्य-गीत से हुआ।
प्रशिक्षक पंकज कुमार ने ‘जल-जीवन-हरियाली’ पर बोलते हुए कहा कि धरती पर जीव-जन्तुओं के आगमन के साथ ही ईश्वर ने उपयोगी पर्याप्त संसाधन दिया है, पर स्वार्थ के वशीभूत मानव ही इसका सर्वाधिक और असंतुलित रूप से उपयोग कर रहा है। कहा कि जल, जीवन और हरियाली एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जल है तो ही जीवन है और हरियाली है, तभी जल एवं जीवन का प्राकृतिक संतुलन बना रहेगा। उन्होंने बताया कि यह राज्य सरकार की एक महत्त्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य वर्तमान के साथ ही भविष्य को भी सुरक्षित करना है। जल का विवेक पूर्ण उपयोग, वर्षा जल का संचय, वृक्षारोपण एवं प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को जन-आंदोलन का रूप देकर हम एक स्वच्छ, हरा-भरा, जल सुरक्षित एवं टिकाऊ समाज बना सकते हैं। हमें सोलर, वायु, जल आदि ऊर्जा के स्रोतों के उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
द्वितीय सत्र में प्रशिक्षिका प्रीति कुमारी ने सर्पदंश- प्रबंधन की जानकारी देते हुए सांपों के प्रकार, काटने के कारण, सांप काटने के बाद दिखने वाले लक्षणों एवं उससे बचाव के उपायों को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत में करीब 275 प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जिनमें 15% ही विषैले होते हैं। भारत में सांप काटने से अभी प्रतिवर्ष करीब 58,000 व्यक्तियों की मृत्यु होती है। उन्होंने विषैले एवं विषहीन सांपों की पहचान के विभिन्न तरीके और काटने के प्रमुख दो कारणों- भोजन एवं बचाव को बताते हुए कहा कि सांप काटने पर झाड़-फूंक या फिल्मी तरीके न अपनाकर सीधे डॉक्टर के पास जाना चाहिए। कहा कि इस क्षेत्र में कोबरा, करैत, बाइपर आदि कुछ ही विषैले सांप पाए जाते हैं। सांप काटने पर रोगी को डराने के बजाय, इनका मूवमेंट कम कर, सोने नहीं देना चाहिए तथा उन्हें ढांढस बंधाना चाहिए।
अगले सत्र में प्रशिक्षक सच्चिदानंद कुमार ने ‘सुरक्षित नौकायन’ का परिचय देते हुए कहा कि नाव जल परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे हम नदी एवं अन्य जलाशयों को पार करते हैं तथा बाढ़ के समय राहत-बचाव कार्यों में प्रयोग करते हैं। जान-माल की हानि से बचने के लिए हमें सावधानियां बरतना जरूरी है। नाव में निर्धारित संख्या में यात्री बैठे, उसमें लाइफ जैकेट उपलब्ध हो, नौकायन से पूर्व जांच हो एवं अन्य आवश्यक उपकरण- रस्सी, टॉर्च, सिटी, संचार उपकरण एवं प्राथमिक उपचार सामग्री आदि उपलब्ध हो। तेज वर्षा एवं आंधी आदि के समय नौकायन से बचना चाहिए। नाविक प्रशिक्षित एवं सतर्क हो, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके और जान-माल की सुरक्षा हो सके। उन्होंने सावधानी, सुरक्षा उपकरण और अनुशासन को सुरक्षित नौकायन के तीन प्रमुख आधार बताया।
अगले सत्र में प्रशिक्षक पंकज कुमार ने “जल स्वच्छता” की जानकारी देते हुए कहा कि जल मानव जीवन की मूलभूत जरूरत है। स्वच्छ जल स्वस्थ जीवन, पर्यावरण एवं सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। दूषित जल के कारण हैजा, टाइफाइड, डायरिया, पेचिस, पीलिया तथा अन्य कई रोग फैलते हैं। जल की स्वच्छता बनाए रखना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने जल दूषित होने के कारणों एवं उन्हें दूर करने के उपायों को विस्तार से बताते हुए ‘स्वच्छ जल : स्वस्थ जीवन’ के संदेश अपने का आह्वान किया।
संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि संगीत हमारे जीवन का अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण भाग है, जिससे हमारा जीवन सुखद, प्रेरणादायक एवं सामंजस्यपूर्ण बनता है। संगीत केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति, भावात्मक अभिव्यक्ति, सामाजिक एकता एवं सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम भी है। संगीत हर्ट रेट एवं ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है तथा नींद में सुधार लाता है। लोक संगीत एवं शास्त्रीय संगीत हमें परंपराओं से जोड़ता है। कहा कि यह छात्रों की एकाग्रता एवं बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित कर, उनकी रचनात्मकता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि लाता है। कार्यक्रम में अनामिका, स्मिता, कल्पना, शिवम, सुमन, आयुष्मान, अनुष्का, अंजलि, साक्षी, अंजू, अंशु, केशव, कुणाल, मोना, राहुल, लालू, सुनील, इबरान, प्रियांशु, नेहा, निलेश आदि स्वयंसेवकों के साथ ही प्रशिक्षकों की ओर से राजू कुमार एवं प्रीति कुमारी ने भी काफी मनोरंजक गायन किया।


