शरीर की आग को ‘रुको, लेटो और लूढ़को’ के सिद्धांत से तथा भूकंप के प्रभाव को ‘झुको, ढको और पकड़ो’ के सिद्धांत से प्रभाव कम करना संभव- एसडीआरएफ
दरभंगा:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से दरभंगा जिला के विभिन्न कॉलेजों से आए 200 एनएसएस स्वयंसेवकों का “युवा आपदा मित्र सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर” का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबिली हॉल में तीसरे दिन जारी रहा। आज के प्रशिक्षण का प्रारंभ राष्ट्रगीत एवं एनएसएस लक्ष्य-गीत से, जबकि समापन राष्ट्रगान से हुआ। प्रशिक्षण में एसडीआर टीम की ओर से रूपेश कुमार पासवान, पंकज कुमार, राजू कुमार, संतोष कुमार, मालिक कुमार, पूजा कुमारी, प्रीति कुमारी तथा मिथिलेश तिवारी के साथ ही
शिविर के संयोजक डॉ आर एन चौरसिया, डॉ रीता कुमारी, डॉ शबनम कुमारी, डॉ सोनू राम शंकर, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ योगेश्वर साह, मणिकांत ठाकुर, मुकेश कुमार झा, सुमित कुमार, रवीन्द्र कुमार सिंह, वैभभ झा, अंकिता कुमारी, विकास कुमार, संजय कुमार महतो आदि ने सक्रियता पूर्वक सहयोग किया।
प्रथम सत्र में प्रशिक्षक पंकज कुमार ने सीपीआर क्या है, क्यों दिया जाता है, कैसे दिया जाता है तथा देने से क्या लाभ होता है आदि की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि हृदय हमारे शरीर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है, जिसके रूक जाने पर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। यदि तात्कालिक रूप से दिल की धड़कन रुक जाए तो सीपीआर देकर पुनः चालू किया जा सकता है। धूम्रपान के सेवन, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक तनाव, मोटापा, मधुमेह, अत्यधिक थकान आदि से हार्ट अटैक की संभावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि सीपीआर एक आपातकालीन प्राथमिक उपचार प्रक्रिया है जो जीवन- मरण की आपात स्थिति में दिया जाता है। अगले सत्र में प्रशिक्षक द्वारा घायल व्यक्ति को सुरक्षित विधि से दूसरे जगह ले जाने के विभिन्न तरीकों को विस्तार से बताया गया। साथ ही घरेलू वस्तुओं से स्टेचर बनाना सिखाया गया, ताकि आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को एंबुलेंस या अस्पताल तक सावधानी से पहुंचा जा सके।
प्रशिक्षिका प्रीति कुमारी ने शारीरिक परीक्षण से स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त करने हेतु विस्तार से विभिन्न तरीकों को बताते देते हुए मानव शरीर में के विभिन्न भागों में स्थित हड्डियों की संख्या, उनके कार्य एवं क्षति की जानकारी दी। कहा कि हड्डियां हमारे अंगों को सुरक्षित, रक्त कोशिकाओं का निर्माण में सहयोग तथा शरीर को एक निश्चित रूप प्रदान करते हैं। उन्होंने हड्डियों को मजबूत रखने के लिए आहार-विहार, खेलकूद-व्यायाम एवं जीवन शैली के व्यावहारिक उपाय बताएं। अगले सत्र में प्रशिक्षक पंकज कुमार ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के अंतर्गत आगलगी एवं संबंधित मॉक ड्रिल की जानकारी देते हुए आग की संरचना, आग लगने के कारण, आग लगने के दुष्प्रभाव तथा बुझाने के विभिन्न सिद्धांतों को समझाया। उन्होंने विभिन्न अग्निशमन यंत्रों के प्रकार, महत्व, काम करने के तरीकों को बताया। शरीर में आग लगने पर ‘रूको, लेटो और लूढ़को’ सिद्धांत से आग बुझाने की जानकारी दी।
अगले सत्र में प्रशिक्षक मालिक कुमार ने भूकंप के कारण, उसका प्रभाव एवं बचाव के उपाय बताते हुए “झुको, ढको और पकड़ो” सिद्धांत से उनके प्रभाव को कम करने का तरीका बताया। उन्होंने बताया कि दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी आदि आठ जिले भूकंप के 5 मेग्नीट्यूड में आते हैं जो काफी खतरनाक है। आपदा की पूर्व तैयारी हेतु सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ नियमित रूप से मॉक ड्रिल पर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य है। अंतिम सत्र में छात्र-छात्राओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विजय कुमार शर्मा, कृष्णा चौधरी, प्रिंस कुमार, विनोद कुमार, प्रसन्न जी चौधरी, सहाना खातून, मिनी कुमारी, स्नेहा कुमारी, अपर्णा कुमारी, रितु कुमारी, मासूम कुमारी, अनिष कुमार, नवनीत कुमार, विजय बिहारी आदि ने भाग लिया।

