नौकरी चाहिए… लेकिन अगर परीक्षा में ही भरोसा नहीं रहेगा, तो मेहनत का क्या मतलब?

बिहार की राजधानी पटना में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए। मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भर्ती व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का है।
25 अगस्त को प्रदर्शनकारी छात्र गांधी मैदान से मार्च करते हुए मुख्यमंत्री आवास और राजभवन की ओर बढ़े। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड लगाए, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए। इसके बाद पुलिस ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई।
छात्रों की प्रमुख मांगों में BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने, और आगामी TRE-4 यानी शिक्षक भर्ती परीक्षा को एक चरण में कराने की मांग शामिल है। अभ्यर्थी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, भर्ती में देरी और पेपर लीक जैसे आरोपों को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।
विवाद तब और बढ़ गया, जब BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी को लेकर छात्रों में नाराजगी फैल गई। इसके बाद बिहार सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया।
हालांकि सरकार की ओर से भी छात्रों की शिकायतें सुनने के लिए 1100 हेल्पलाइन शुरू करने और शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था बनाने की बात कही गई है।
लेकिन सवाल अब भी वही है
क्या बिहार के इन अभ्यर्थियों को सिर्फ आश्वासन मिलेगा, या भर्ती परीक्षाओं में ऐसा बदलाव होगा जिससे उन्हें अपनी मेहनत और अपने भविष्य पर दोबारा भरोसा हो सके?
क्योंकि ये सिर्फ एक परीक्षा की लड़ाई नहीं…
ये उन हजारों युवाओं के भविष्य की लड़ाई है, जो सालों से एक सरकारी नौकरी की उम्मीद में तैयारी कर रहे हैं।

