दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में मंगलवार को बड़े ही उत्सवी माहौल में संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम 31 तक चलेगा। इस अवसर पर संस्कृत से जुड़ीं विभिन्न तरह की गतिविधियों व प्रतियोगिताओं के साथ साथ शास्त्र चर्चा भी होगी। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि इन दिनों बड़े प्लेटफॉर्म पर भी मनुस्मृति को कोसा जा रहा है जो बेहद ही दुखद व चिन्तनीय है। इससे युवा पीढ़ी दिगभ्रमित हो रहे हैं। यह भरतीय संस्कृति पर कुठाराघात है जबकि सच्चाई यह है कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत को जानना व समझना होगा। अपने यहां की सामाजिक व्यवस्था पहले से ही सुदृढ़ है। संस्कृत के जरिये अच्छे विचारों व संस्कारों को प्रचारित- प्रसारित करने की जरूरत है। ऐसा करने से अपराध व कुरीतियों पर दमन विल्कुल सम्भव है। उन्होंने कहा कि मनु स्मृति का पहला ठोस उद्देश्य ही है कि हम मनुष्य बनें और मानवता पले बढ़े। उन्होंने कहा कि सभी तरह के सम्बन्धों में परस्पर विश्वास, भरोसा, एकता व सम्मान बेहद जरूरी है और इसके लिए मनुस्मृति में लाखों व्यवस्थाएं दी हुई हैं। ऐसे में पाश्चात्य संस्कृति को अनावश्यक प्राश्रय देना भारतीयता पर ही चोट होगी। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि संस्कृत का विश्व स्तर पर फैलाव करना है। उन्होंने कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी दरभंगा के सहायक निदेशक सह कार्यक्रम प्रमुख अमित कुमार की प्रचार प्रसार सम्बन्धी भावनाओं का स्वागत किया। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि सारस्वत अतिथि पूर्व कुलपति डॉ शशिनाथ झा मौके पर बेहद संवेदनशील थे। उन्होंने कहा कि योग्य व शास्त्रों के जानकारों की ही नियुक्ति हो। तभी संस्कृत की भलाई होगी और इसकी व्यापकता बढ़ेगी। वहीं विशिष्ट अतिथि एलएनएमयू अंग्रेजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार बच्चन ने कहा कि संस्कृत साहित्य बहुत गहरी व जीवनोपयोगी है। संस्कृत को सिर्फ मन्दिर- मठ व पूजा- पाठ की भाषा समझना बेहद नासमझी होगी। जबकि सच्चाई यह है कि यहां की सभी भाषाओं की यह जननी रही है। उन्होंने कहा कि संस्कृत है तो संस्कार है और यही हमारी भारतीय संस्कृति की मूल पूंजी है। इसी क्रम में प्रो. बच्चन ने सभी से आह्वान किया कि वे युवा पीढ़ी को इस कार्यक्रम से जोड़कर संस्कृत के प्रति जागरूक करें। नीति श्लोक व गीता पाठ के जरिये भी उन्हें संस्कृत से जुड़ाव कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन के करीब- करीब सभी मामलों में संस्कृत शब्दों का सीधा प्रभाव रहा है। यहां तक कि नेशनल मोटो यानी राष्ट्रीय उद्देश्य सत्यमेव जयते भी संस्कृत से ही है। वहीं, विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी के सहायक निदेशक श्री कुमार ने कहा कि संस्कृत में मनोरंजक कार्यक्रमों को तैयार कर इसे जनता से सीधे जोड़ा जा सकता है। इसमें युवाओं को अधिक भागीदारी रखनी होगी। उन्होंने कहा कि संस्कृत में भी अन्य भाषाओं की तरह रोचक कार्यक्रम तैयार कर हम इसका प्रचार प्रसार कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि व्यवहार में लाने के बाद ही भाषाओं का पोषण होता है। उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो पांडेय से इस ओर सहयोग की अपील की। इस पर कुलपति ने संस्कृत में कार्यक्रम तैयार कराने में सहर्ष सहयोग का भरोसा दिया।
इसके पूर्व आगत अतिथियों संग कुलपति प्रो पांडेय, विशिष्ट अतिथि स्नातकोत्तर प्रभारी प्रो दिलीप कुमार झा, कुलसचिव डॉ दिनेश झा व डीन प्रो पुरेन्द्र वारिक ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। स्नातकोत्तर विभाग,शिक्षाशास्त्र विभाग,म.अ.रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय एवं संस्कृत भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में स्वागत गान व कुलगीत की प्रस्तुति छात्राओं द्वारा की गई। आगत अतिथियों का स्वागत अध्य्क्ष छात्र कल्याण प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने किया। उद्घाटन सत्र के संजोजक एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी सहायक प्राध्यापक डॉ सुधीर कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सहायक प्राध्यापक डॉ रामसेवक झा के संचालन में सम्पन्न कार्यक्रम के मौके पर सभी पदाधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।

