बहेड़ी। बहेड़ी थाना क्षेत्र के महुली गांव के खरहौर में मंगलवार की सुबह एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। सुबह करीब आठ बजे सुनसान इलाके में आम के पेड़ के पास से उठती तेज दुर्गंध ने ग्रामीणों का ध्यान खींचा। शुरुआत में किसी ने नहीं सोचा था कि यह दुर्गंध एक ऐसे भयावह दृश्य की ओर ले जाएगी, जिसके बाद गांव में देर तक सनसनी और खामोशी पसरी रही।
बकरी चरा रहे ग्रामीणों को जब दुर्गंध का स्रोत जानने की आशंका हुई और वे पेड़ के समीप पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। आम के पेड़ पर एक युवक का सिर वाला हिस्सा गमछे के सहारे लटका हुआ था, जबकि शरीर का शेष हिस्सा नीचे जमीन पर पड़ा था। शव करीब दस दिन पुराना बताया जा रहा है और सड़ने-गलने की अवस्था में होने के कारण मौके का दृश्य बेहद विचलित करने वाला था। देखते ही देखते घटना की खबर आसपास के गांवों तक फैल गई और घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मृतक की पहचान महुली गांव निवासी बुधन पंडित के 28 वर्षीय पुत्र किशन पंडित के रूप में हुई है। पहचान चप्पल और कपड़ों के आधार पर की गई। स्वजन के अनुसार किशन करीब दस दिन पहले घर से निकला था। उसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिवार के लोग अपने स्तर से उसकी तलाश करते रहे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस युवक की तलाश घर-परिवार और परिचितों के बीच चल रही है, उसकी कहानी गांव से कुछ दूरी पर एक आम के पेड़ के नीचे इस तरह खत्म हो चुकी है।
दुर्गंध ने खोला मौत का राज: मंगलवार की सुबह तक यह स्थान सामान्य था। फिर अचानक तेज दुर्गंध ने ग्रामीणों को उस ओर जाने के लिए मजबूर किया। पेड़ के पास पहुंचते ही जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे मामले को रहस्य में बदल दिया। सड़-गल चुके शव का एक हिस्सा पेड़ से लटका था और बाकी हिस्सा जमीन पर पड़ा था। शव की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने भी माना कि युवक की मौत कई दिन पहले हुई होगी। सूचना मिलते ही बहेड़ी थानाध्यक्ष सूरज कुमार गुप्ता पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए बेनीपुर के एसडीपीओ बासुकीनाथ झा भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वैज्ञानिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की पड़ताल के लिए एफएसएल टीम को भी बुलाया गया। घटनास्थल पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ी तो ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। आखिर किशन वहां कब पहुंचा? वह घर से निकलने के बाद सीधे इस स्थान तक कैसे पहुंचा? उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? और शव की यह स्थिति कैसे बनी? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं।
दस दिन की गुमशुदगी के बाद सामने आया खौफनाक सच: किशन के परिवार के लिए यह घटना केवल एक मौत की सूचना नहीं, बल्कि करीब दस दिनों से चले आ रहे इंतजार का भयावह अंत है। घर से निकलने के बाद जब वह वापस नहीं लौटा तो स्वजन उसकी तलाश करते रहे। लेकिन समय बीतता गया और उसका कोई पता नहीं चला। अब जब उसका शव मिला है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन दस दिनों के दौरान किशन के साथ क्या हुआ। पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका जता रही है, लेकिन मामले की जांच अभी जारी है। घटनास्थल से मिले साक्ष्य, परिस्थितियां और अन्य तथ्यों के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
वैवाहिक जीवन का तनाव भी जांच के घेरे में: पुलिस की प्रारंभिक जांच में किशन के निजी जीवन से जुड़े कुछ ऐसे पहलू सामने आए हैं, जिनसे उसके मानसिक तनाव में रहने की बात सामने आती है। बताया गया कि करीब आठ वर्ष पहले किशन ने दिल्ली में अपने से 13 वर्ष बड़ी महिला से प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद लगभग एक वर्ष तक दोनों साथ रहे और इस दौरान उनके एक पुत्र का जन्म भी हुआ। बाद में पत्नी बच्चे को लेकर किशन से अलग हो गई। पत्नी और बच्चे के अलग होने के बाद किशन के जीवन में परिस्थितियां बदलती चली गईं। स्वजन के अनुसार इसके बाद वह तनाव में रहने लगा था। बताया गया कि करीब दो माह पहले किशन का अपनी मां से भी विवाद हुआ था। विवाद के बाद वह घर छोड़कर चला गया था। परिवार के लिए यह स्थिति पहले ही चिंता का कारण बनी हुई थी। लेकिन अब दस दिन बाद उसकी मौत की खबर ने उन तमाम घटनाओं को फिर से सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: किशन अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। उसकी दो बहनों की शादी हो चुकी है। ऐसे में परिवार के लिए उसकी मौत का सदमा और भी गहरा बताया जा रहा है। जिस बेटे की वापसी का इंतजार परिवार कर रहा था, उसी बेटे का शव अचानक इस हालत में मिलने से घर में मातम का माहौल है। घटनास्थल पर पहुंचे स्वजन ने चप्पल और कपड़ों के आधार पर किशन की पहचान की। पहचान होते ही परिजनों के बीच मातम छा गया। ग्रामीण भी इस घटना से स्तब्ध नजर आए। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। यही वजह है कि मामले में अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। घटनास्थल की परिस्थितियां कई सवाल खड़े कर रही हैं। किशन घर से कब निकला, उसके बाद वह किस रास्ते से यहां पहुंचा, घटनास्थल तक पहुंचने के दौरान उसके साथ क्या हुआ और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई…इन सभी बिंदुओं पर जांच आवश्यक है। शव की स्थिति के कारण घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों को समझना भी पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण है। एफएसएल टीम की जांच और पुलिस की पड़ताल से मिलने वाले साक्ष्य इस रहस्य की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पोस्टमार्टम पर भी बना रहा असमंजस: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया। हालांकि स्वजन पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं हुए। पुलिस ने काफी समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन जब परिजन राजी नहीं हुए तो अंततः पंचनामा तैयार कर शव स्वजन को सौंप दिया गया। अब इस पूरे मामले में पुलिस की जांच ही यह स्पष्ट करेगी कि किशन की मौत के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं। फिलहाल महुली के खरहौर में मिला यह शव कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है। दस दिन से लापता युवक की तलाश का अंत जिस भयावह दृश्य के साथ हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक ओर पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका जता रही है, तो दूसरी ओर घटना की परिस्थितियां लोगों के मन में कई सवाल पैदा कर रही हैं। मौत का सच क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल महुली के खरहौर में आम का वह पेड़ एक ऐसी अनसुलझी कहानी का मौन गवाह बन गया है, जिसकी हर कड़ी पुलिस की जांच से जुड़ी हुई है।

