डेस्क: डिजिटल (Digital) दौर में कुछ ही मिनटों में लोन (Loan) मिल जाना लोगों के लिए सुविधाजनक जरूर है, लेकिन यही सुविधा कई बार बड़े आर्थिक और मानसिक संकट (Mental crisis) में बदल जाती है। बिना बैंक जाए और बिना गारंटी के तुरंत कर्ज देने का दावा करने वाले कई ऐप लोगों को ऐसे जाल में फंसा देते हैं, जहां रकम की वसूली के लिए कथित तौर पर धमकी, ब्लैकमेलिंग और उत्पीड़न तक का सहारा लिया जाता है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में लोन ऐप से जुड़ी धोखाधड़ी की एक लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लोन रिकवरी के दौरान उत्पीड़न और अमानवीय व्यवहार से जुड़ी 18,021 शिकायतें सामने आईं। यह संख्या 2024-25 में दर्ज 8,623 शिकायतों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
इन मामलों में 15 ऐसे केस भी सामने आए जिनमें कर्ज लेने वालों की मौत हो गई, जिनमें आत्महत्या के मामले भी शामिल थे। हालांकि, देशभर में सिर्फ लोन रिकवरी के दबाव या प्रताड़ना से हुई मौतों का कोई आधिकारिक समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
1,100 से ज्यादा ऐप की पहचान, 600 से अधिक अवैध
संसद में वित्त मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी और नियामकीय कार्रवाई के आधार पर पता चला है कि RBI ने विभिन्न ऐप स्टोर पर 1,100 से ज्यादा डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की पहचान की थी। इनमें 600 से अधिक ऐप अवैध तरीके से संचालित पाए गए।
वहीं देश में करीब 500 से 600 वैध डिजिटल लेंडिंग ऐप काम कर रहे हैं। ये आमतौर पर बैंकों या कानूनी रूप से पंजीकृत NBFCs से जुड़े होते हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि RBI सीधे किसी लोन ऐप को मंजूरी नहीं देता। नियमन बैंक और NBFC जैसी संस्थाओं पर लागू होता है। इसलिए किसी ऐप का मोबाइल ऐप स्टोर पर उपलब्ध होना अपने आप में उसके वैध होने की गारंटी नहीं है।
डिजिटल लोन का बाजार पांच साल में 13 गुना बढ़ा
भारत में डिजिटल लेंडिंग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह बाजार FY2021 में करीब ₹0.15 ट्रिलियन था, जो FY2026 में बढ़कर लगभग ₹2.2 ट्रिलियन हो गया।
अनुमान है कि FY2031 तक कुल पर्सनल लोन की मंजूरी में डिजिटल लेंडिंग की हिस्सेदारी 20-21 फीसदी तक पहुंच सकती है। FY2026 से FY2031 के बीच इस क्षेत्र के करीब 26-27 फीसदी डिजिटल CAGR से बढ़ने का अनुमान है।
लोन की आसान उपलब्धता और तेजी से मंजूरी के कारण डिजिटल माध्यम अब कर्ज लेने वालों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
31% लोग बैंक से डिजिटल लेंडिंग की तरफ आए
डिजिटल लेंडिंग ने केवल बैंकिंग व्यवस्था का विकल्प नहीं बनाया, बल्कि नए ग्राहकों को भी कर्ज बाजार से जोड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 31 फीसदी उधार लेने वाले लोग बैंकिंग चैनल से डिजिटल लेंडिंग की ओर आए हैं।
हालांकि बड़े और सिक्योरिटी वाले लोन के मामले में बैंक अभी भी मजबूत स्थिति में हैं। वहीं बिना किसी गारंटी के मिलने वाले लोन का क्षेत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए तेजी से बढ़ता बाजार बन रहा है।
फर्जी लोन ऐप को कैसे पहचानें?
लोन ऐप डाउनलोड करने से पहले सिर्फ उसके विज्ञापन या रिव्यू देखकर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर इन बातों का ध्यान रखें:
ऐप किस बैंक या NBFC के साथ जुड़ा है, इसकी पुष्टि करें।
लोन देने वाली वास्तविक संस्था RBI के नियामकीय दायरे में है या नहीं, जांचें।
अत्यधिक कम ब्याज, तत्काल लोन या बिना दस्तावेज के बड़ी रकम देने के दावे से सावधान रहें।
जो ऐप अनावश्यक रूप से कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो, मैसेज या अन्य निजी डेटा की पहुंच मांगता हो, उससे सतर्क रहें।
लोन लेने से पहले ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, लेट फीस और अन्य शुल्क की पूरी जानकारी पढ़ें।
किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, बैंक पासवर्ड या संवेदनशील दस्तावेज साझा न करें।
वसूली के नाम पर धमकी मिले तो क्या करें?
अगर कोई डिजिटल लोन कंपनी या रिकवरी एजेंट धमकी, ब्लैकमेलिंग या अपमानजनक तरीके से पैसे वसूलने की कोशिश करता है तो घबराकर भुगतान करने के बजाय सभी कॉल, मैसेज, स्क्रीनशॉट और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। इसके बाद संबंधित बैंक/NBFC और साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था में शिकायत की जा सकती है।
सबसे जरूरी बात: तुरंत लोन मिलने की सुविधा के पीछे छिपी शर्तों को समझे बिना किसी ऐप से कर्ज लेना भारी पड़ सकता है। खासकर ऐसे ऐप से बचना चाहिए जिसकी वास्तविक लेंडिंग संस्था और नियामकीय स्थिति स्पष्ट न हो।

