डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की लोकप्रियता (Popularity) को लेकर सामने आए एक नए सर्वे ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रॉयटर्स/इप्सोस के ताजा पोल के मुताबिक ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग (Approval rating) गिरकर 33 फीसदी रह गई है। यह उनके मौजूदा कार्यकाल की अब तक की सबसे कम रेटिंग बताई जा रही है।
चार दिनों तक चले इस सर्वे में शामिल लोगों में से केवल 33 फीसदी ने राष्ट्रपति के तौर पर ट्रंप के कामकाज को मंजूरी दी। वहीं 67 फीसदी लोगों ने उनके प्रदर्शन को अस्वीकार किया। इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में हुए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 35 फीसदी थी। यानी कुछ ही समय में इसमें दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
ईरान के साथ युद्ध को लेकर बढ़ी चिंता
ट्रंप की गिरती लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ी वजहों में ईरान के साथ बढ़ता तनाव माना जा रहा है। सर्वे के मुताबिक बड़ी संख्या में अमेरिकी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंच सकता है।
इस साल ट्रंप की लोकप्रियता को सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब उन्होंने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा है और दोनों देशों के बीच अब तक किसी स्थायी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है।
शुरुआत में लगा था तनाव जल्द खत्म होगा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद शुरुआत में ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच टकराव जल्द खत्म हो सकता है। हालांकि समय के साथ हालात और गंभीर होते गए और सैन्य टकराव ने अमेरिकी राजनीति पर भी असर डालना शुरू कर दिया।
फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव में कुछ कमी के संकेत जरूर हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
ट्रंप के लिए बढ़ती चुनौती
ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट ऐसे समय में हुई है, जब उनकी विदेश नीति और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर अमेरिकी जनता के बीच चिंता बढ़ रही है। 33 फीसदी की अप्रूवल रेटिंग उनके मौजूदा कार्यकाल में नया निचला स्तर है।
अगर ईरान के साथ संघर्ष लंबा चलता है या ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर बढ़ता है, तो आने वाले समय में यह मुद्दा ट्रंप प्रशासन के लिए और बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

