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कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर दो दिन बाद पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे

डेस्क:  दक्षिण दिल्ली (South Delhi) के कालकाजी थाना (Kalkaji Police Station) क्षेत्र में रिश्तों को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। गोविंदपुरी एक्सटेंशन (Govindpuri Extension) में किराए के मकान में रहने वाले 64 वर्षीय संगीतकार (Musician) रवि डे का शव करीब पांच दिनों तक घर में पड़ा रहा। शव की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उसमें से तेज दुर्गंध (Strong Odor) आने लगी थी। पुलिस के पहुंचने तक शव पूरी तरह सड़-गल चुका था। हैरानी की बात यह है कि मृतक के दोनों बेटे लाजपत नगर में रहते हैं और उनके पिता के घर से उनकी दूरी महज साढ़े पांच किलोमीटर बताई गई है।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस के अनुसार, 14 अगस्त की रात करीब 11 बजे कालकाजी थाने को पीसीआर कॉल मिली थी। कॉल में एक मकान से तेज बदबू आने की जानकारी दी गई थी। सूचना मिलते ही कालकाजी थाना प्रभारी अजय कुमार, एसआई सचिन और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। घर का दरवाजा अंदर से बंद था। पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो बाथरूम के गेट के पास रवि डे का शव पड़ा मिला।
पुलिस के मुताबिक शव कई दिनों पुराना था और पूरी तरह सड़-गल चुका था। शरीर पर कपड़े नहीं थे और शव में कीड़े पड़ चुके थे। आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस ने मृतक के परिवार के बारे में जानकारी जुटाई। इसी दौरान लाजपत नगर में रहने वाले उनके दोनों बेटों का पता चला। पुलिस ने दोनों को पिता की मौत की सूचना दी और उन्हें मौके पर आने के लिए कहा।
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलने के बाद बेटों ने तत्काल आने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स में सुरक्षित रखवा दिया। अधिकारियों ने बेटों को समझाया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए अस्पताल आने को कहा। पुलिस के समझाने के बाद दोनों बेटे 16 अगस्त को एम्स पहुंचे। वहां पिता के शव का पोस्टमार्टम कराया गया और प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव बेटों को सौंप दिया गया।
रवि डे पेशे से संगीतकार थे और गोविंदपुरी एक्सटेंशन के मकान संख्या 1640/5 में किराए पर रहते थे। उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है। पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को भी जुटाया जा रहा है। फिलहाल मौत की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
यह घटना महानगरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की स्थिति और पारिवारिक संबंधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर तब जब परिवार के सदस्य बहुत अधिक दूरी पर नहीं रहते हों। महज साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी के बावजूद पिता के कई दिनों तक अकेले पड़े रहने की जानकारी सामने आने से लोगों में भी चिंता है।

कालकाजी पुलिस मामले की जांच के साथ स्थानीय लोगों के बयान दर्ज कर रही है। घटना ने यह सवाल भी सामने रखा है कि क्या व्यस्त शहरी जीवन में परिवार के बुजुर्गों की नियमित देखभाल और उनसे संपर्क कमजोर होता जा रहा है। एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत के बाद कई दिनों तक शव का घर में पड़े रहना न केवल प्रशासनिक बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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