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फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने बिना अनुमति सुरक्षा हटाने को लेकर पुलिस अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप

डेस्क: मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Additional District And Sessions Judge) और फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर (Ravi Kumar Diwakar) ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (Director General Of Police) को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि उनकी सुरक्षा में तैनात गनर कांस्टेबल रविंद्र सिंह ठकुरैला (Ravindra Singh Thakurela) को बिना किसी कारण और उनकी अनुमति के हटा दिया गया।
रवि कुमार दिवाकर ने अपने पत्र में प्रतिसार निरीक्षक उदल सिंह पर सुरक्षा व्यवस्था में मनमानी और लापरवाही का आरोप लगाया है। न्यायिक अधिकारी के अनुसार उनकी सुरक्षा में तैनात गनर को हटाने से पहले न तो उनसे अनुमति ली गई और न ही उन्हें इस संबंध में कोई उचित कारण बताया गया।
जज ने पत्र में सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारियों के गनर को उनकी सहमति के बिना नहीं बदला जाता। उनके अनुसार न्यायिक अधिकारी के मामले में इस व्यवस्था का पालन नहीं किया गया।
रवि कुमार दिवाकर ने यह भी बताया कि गनर रविंद्र सिंह ठकुरैला को हटाए जाने के बाद उन्होंने भी बिना सूचना दिए अपनी ड्यूटी छोड़ दी। इससे न्यायिक अधिकारी की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जज ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस महानिदेशक को देते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है।
रवि कुमार दिवाकर पिछले कुछ समय में अपने कई चर्चित फैसलों के कारण भी चर्चा में रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने महज 129 दिनों के दौरान नौ मामलों में 22 लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। इन मामलों में गंभीर आपराधिक घटनाओं से जुड़े मुकदमे शामिल रहे हैं। लगातार कठोर सजा वाले फैसलों के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता की आवश्यकता मानी जा रही है।
न्यायिक अधिकारी ने अपने पत्र में इस बात पर भी जोर दिया है कि न्यायाधीशों की सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही गंभीर विषय हो सकती है। न्यायिक कार्यों के दौरान महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा के लिए निर्धारित व्यवस्थाओं का पालन जरूरी माना जाता है।
गनर हटाए जाने के घटनाक्रम के बाद अब यह मामला पुलिस प्रशासन के स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। जज की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गनर को हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया था और इसमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।

मामले में पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्र के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर निगाह रहेगी। फिलहाल न्यायिक अधिकारी ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस पूरे घटनाक्रम की ओर आकर्षित किया है।

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