ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के एनएसएस कोषांग द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से समस्तीपुर जिला के 200 स्वयंसेवक छात्र- छात्राओं का सात दिवसीय आवासीय आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर दूसरे दिन जुबिली हॉल में जारी रहा, जिसमें एसडीआरएफ, बिहटा, पटना के हवलदार कृष्ण नंदन सिंह, देव कुमार, रूपेश कुमार पासवान, खोखो कुमार, राजू कुमार, मालिक कुमार, तनुजा कुमारी एवं संतोषी कुमारी आदि ने विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया। शिविर का प्रारंभ राष्ट्रगीत एवं एनएसएस लक्ष्य-गीत से हुआ। इस अवसर पर डॉ शबनम कुमारी, डॉ प्रेम कुमारी, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ रीता कुमारी, डॉ लक्ष्मण यादव, डॉ उदय कुमार, डॉ सोनू राम शंकर, मनीष राज, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अमित कुमार झा, सुमित कुमार, रवीन्द्र कुमार सिंह, विकास कुमार आदि ने सक्रिय सहयोग किया। दरभंगा सदर अस्पताल से एम्बुलेंस के साथ ही गजेन्द्र गोलिया, पिंकी कुमारी, चन्दा कुमारी भारती एवं अमित कुमार पासवान ने स्वयंसेवकों के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराया। शिविर का शुभारंभ करते हुए संयोजक डॉ आर एन चौरसिया ने स्वयंसेवकों के अनुशासन, उत्साह एवं क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि शिविर में सिखाते गये आपदा प्रबंधन के तौर- तरीके पूरे जीवन में व्यावहारिक रूप से काम आएंगे, जिससे समाज को काफी लाभ होगा।
तकनीकी सत्र में खोखो कुमार ने बाढ़ आने का कारण, उसका प्रभाव एवं बचने के उपायों को विस्तार से बताया। साथ ही डूबने वाले व्यक्ति को बाहर से एवं पानी में जाकर बचाव करने, पेट से पानी निकालने के तरीके भी बताये। कहा कि बिहार के 28 जिले के 76% व्यक्ति बाढ़ प्रभावित हैं। इनमें 12 जिले सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित हैं। उन्होंने डूबने वाले व्यक्ति को बचाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी। यदि व्यक्ति पानी पी लिया हो तो पानी निकालने के विभिन्न तरीकों को विस्तार से बताया।
अगले सत्र में रूपेश कुमार पासवान एवं राजू कुमार ने बीपी, आला, थर्मोमीटर, बल्ब मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर रेगुलेटर, कलम रोशनी, सीजर, रिबन, फेस मास्क, ग्लव्स, गाउन आदि का प्रदर्शन करते हुए उसकी कार्य विधि एवं उपयोगिता को विस्तार से बताया। साथ ही सीपीआर देने की स्थिति, सही विधि एवं उपयोग के लाभों की जानकारी दी। संध्या काल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्वागत डॉ शबनम कुमारी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ रीता कुमारी ने किया। समापन राष्ट्रगान से हुआ।
प्रशिक्षित में प्राथमिक उपचार की जानकारी दी गई। आज एसडीआरएफ टीम के प्रशिक्षक खोखो ने दूषित पानी को शुद्ध करने की विधि एवं जो व्यक्ति पानी में तैरना नहीं जानते हैं, उन्हें अपने घरों में एम्प्रोवाइड राफ्ट, जिससे पानी में एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से जाया जा सके, की जानकारी दी। उन्होंने डूब रहे व्यक्ति को बचाने की विधियां, जिसमें नॉन स्विमर, ड्राई रेस्क्यू करके डूब रहे व्यक्तियों को बचा सकते हैं। इसमें थ्रो मेथड, रिच मेथड, वेडिंग मेथड एवं ह्यूमन चेन पद्धति की जानकारी दी। ‘स्वीमर वेट रेस्क्यू’ करके बचाने की विधि में चिन टो, हेड टो, आर्म टो और क्रॉस टो के माध्यम से कैसे बचाएं इसकी भी जानकारी दी। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि बचाने के दौरान बचावकर्ता को डूबते व्यक्ति के पकड़ लेने पर अनलॉक की तरीके एवं प्राथमिक उपचार कैसे करें?
अगले सत्र में एसडीआरएफ टीम के प्रशिक्षक रूपेश कुमार ने एनएसएस स्टूडेंट्स को प्राथमिक उपचार के विभिन्न विधियों की जानकारी दी, जिसमें रक्तस्राव नियंत्रण की विधियाँ जैसे बाहरी रक्तस्राव में नियंत्रण के चार विधि (डायरेक्ट प्रेशर, एलिवेशन, प्रेशर पॉइंट, टेर्निक्विट) एवं आंतरिक रक्तस्राव को रोकने के लिए राइस पद्धति (रेस्ट, आई, कंप्रेस, एलीवेट) पद्धति के माध्यम से रक्तस्राव प्रबंधन की जानकारी दी। रक्तस्राव नियंत्रण की विधियों को बताते हुए उन्होंने बताया कि रक्त हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यदि दुर्घटना के बाद शरीर में मौजूद 5 से 6 लीटर रक्त में से 30 से 35% रक्त स्राव होने से व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।

