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बिहार के नाथनगर के हैंडलूम व्यवसायी, शिव शंकर को मिला राष्ट्रपति भवन से विशेष आमंत्रण

डेस्क:  नाथनगर के गनौरा बादरपुर निवासी मास्टर बुनकर शिव शंकर तांती का हुनर अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंचेगा। राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस (सात अगस्त) के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने उन्हें बिहार के तीन बुनकरों में शामिल करते हुए विशेष आमंत्रण दिया है।

वह पहली बार राष्ट्रपति भवन जाएंगे। उनके चयन से स्वजन और क्षेत्र के बुनकरों में उत्साह है।

 

केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने बिहार से शिव शंकर तांती के अलावा गया जिले के मानपुर निवासी दुख्खन टवा और बिहारशरीफ के बुनकर नवीन कुमार का चयन किया है। तीनों बुनकर दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं। इन्हें बुनकर सेवा केंद्र की ओर से भेजा गया है। राष्ट्रपति भवन में देशभर से आमंत्रित बुनकरों और हस्तशिल्पियों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

26 साल से जिंदा रखा पुश्तैनी हुनर

 

पेशे से मास्टर बुनकर शिव शंकर तांती पिछले 26 वर्षों से पारंपरिक हस्तकरघा उद्योग (हैंडलूम इंडस्ट्री) को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। वह स्वयं डिजाइन तैयार करने के साथ स्थानीय लोगों को कपड़ा बुनाई का प्रशिक्षण भी देते हैं।

उन्होंने बताया कि जब कई लोग हैंडलूम का काम छोड़कर दूसरे रोजगार की ओर जा रहे हैं, तब उन्होंने अपने पुश्तैनी व्यवसाय को न केवल बचाए रखा, बल्कि आसपास के बुनकर परिवारों को भी इससे जोड़ा।

 

शिव शंकर के प्रयास से करीब 30 बुनकर परिवारों को नियमित काम मिल रहा है। वह बुनकरों से कपड़ा तैयार करवाकर बाजार में बिक्री कराते हैं और उन्हें उचित मेहनताना दिलाते हैं। इससे बुनकर महाजनों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

 

दिल्ली हाट में बिहार का एकमात्र स्टॉल

 

शिव शंकर इन दिनों दिल्ली हाट में भी भागलपुर के हस्तकरघा उत्पादों की पहचान बढ़ा रहे हैं। वस्त्र मंत्रालय की ओर से एक से 15 अगस्त तक आयोजित दिल्ली हाट में बिहार से एकमात्र स्टाल लगाने के लिए उनकी पत्नी जूली देवी को आमंत्रित किया गया है।

यहां भागलपुर के पारंपरिक हस्तकरघा उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जा रही है। स्टॉल पर सिल्क साड़ियों की भी मांग बनी हुई है।

 

राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के लिए आमंत्रित बुनकरों को सात अगस्त की सुबह आठ बजे तक प्रवेश करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शुरू होगा। समारोह में देश के कई बुनकरों को राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

 

हालांकि, इस वर्ष बिहार से किसी भी बुनकर का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नहीं हुआ है। पिछले वर्ष बिहारशरीफ के बुनकर कमलेश कुमार को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

 

शिव शंकर तांती ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि भागलपुर की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा और उन सभी बुनकर परिवारों का है, जो कठिन परिस्थितियों में भी इस विरासत को जीवित रखे हुए हैं। उनके राष्ट्रपति भवन पहुंचने से भागलपुर के हस्तकरघा उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

 

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