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चालू खाते का घाटा जून में बढ़कर 6.2 अरब डॉलर परः आरबीआई आंकड़ा

डेस्क: देश का चालू खाते का घाटा (कैड) जून महीने में बढ़कर 6.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी माह में 1.2 अरब डॉलर का अधिशेष दर्ज किया गया था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शुक्रवार को जारी प्रारंभिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली। आरबीआई ने कहा कि चालू खाते का घाटा मुख्य रूप से व्यापारिक वस्तुओं के बढ़ते व्यापार घाटे के कारण बढ़ा। जून में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 30.2 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 19.2 अरब डॉलर था। जून में वस्तुओं का निर्यात बढ़कर 41.2 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 35.3 अरब डॉलर था।
वहीं, आयात इससे तेज गति से बढ़कर 71.4 अरब डॉलर हो गया, जो जून 2025 में 54.5 अरब डॉलर था। हालांकि, सेवा क्षेत्र में अधिशेष बढ़कर 17.9 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 16.2 अरब डॉलर था। सेवा निर्यात 32.1 अरब डॉलर से बढ़कर 36.4 अरब डॉलर हो गया, जबकि सेवा आयात 15.9 अरब डॉलर से बढ़कर 18.5 अरब डॉलर रहा। शुद्ध अंतरण भी जून में बढ़कर 11.9 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले 10.9 अरब डॉलर था। वहीं, शुद्ध आय घाटा 6.8 अरब डॉलर से घटकर 5.8 अरब डॉलर रह गया।
पूंजी खाते में जून 2026 में 9.1 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ, जबकि एक साल पहले इसी महीने में 1.6 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी हुई थी। जून में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 1.3 अरब डॉलर रहा, जबकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश से 2.5 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ। आलोच्य महीने में समग्र भुगतान संतुलन 2.9 अरब डॉलर अधिशेष में रहा, जबकि जून 2025 में इसमें 0.4 अरब डॉलर का घाटा था।
अप्रैल-जून तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा बढ़कर 85.7 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 68.9 अरब डॉलर था। इस दौरान सेवा क्षेत्र का अधिशेष 47.9 अरब डॉलर से बढ़कर 52.2 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल-जून 2026 में शुद्ध अंतरण भी बढ़कर 41.4 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 30.9 अरब डॉलर था। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, जून तिमाही के दौरान समग्र भुगतान संतुलन 8.1 अरब डॉलर के घाटे में रहा, जबकि अप्रैल-जून 2025 में यह 4.5 अरब डॉलर अधिशेष में था।

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