डेस्क: भारतीय पुरुष हॉकी टीम (Indian men’s hockey team) एक बार फिर उस ट्रॉफी को हासिल करने के मिशन पर है, जिसका इंतजार 51 साल से किया जा रहा है. नीदरलैंड्स (Netherlands) और बेल्जियम (Belgium) में 15 से 30 अगस्त तक होने वाले FIH (International Hockey Federation) पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में भारत खिताब के लिए मैदान में उतरेगा.
भारत ने आखिरी बार 1975 में हॉकी वर्ल्ड कप जीता था. इसके बाद टीम न तो खिताब जीत सकी और न ही पोडियम पर जगह बना सकी. अब कप्तान हरमनप्रीत सिंह और कोच क्रेग फुल्टन की अगुवाई में टीम इस लंबे इंतजार को खत्म करने की कोशिश करेगी.
पेरिस ओलंपिक में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाने वाले फुल्टन के सामने इस बार चुनौती और बड़ी है. टूर्नामेंट में दुनिया की 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं और इस बार प्रतियोगिता का फॉर्मेट भी पहले से अलग है.
भारत किस ग्रुप में है?
भारत को पूल D में रखा गया है. इस ग्रुप में उसके साथ वेल्स, इंग्लैंड और चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान हैं. हर टीम ग्रुप में बाकी तीन टीमों के खिलाफ एक-एक मुकाबला खेलेगी. ग्रुप की टॉप-2 टीमें दूसरे राउंड में पहुंचेंगी.
हॉकी वर्ल्ड कप के बाकी ग्रुप कौन से हैं?
पूल A: नीदरलैंड्स, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड, जापान
पूल B: बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, मलेशिया
पूल C: ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, आयरलैंड, साउथ अफ्रीका
भारत के लिए ग्रुप स्टेज में हर मुकाबला अहम होगा, क्योंकि दूसरे राउंड में पहुंचने के लिए टॉप दो में रहना जरूरी है.
भारत का पूरा शेड्यूल
भारत अपने तीनों ग्रुप मुकाबले नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वेगनर हॉकी वेगनर हॉकी स्टेडियम में खेलेगा.
तारीखमुकाबलामुकाबलास्थान15 अगस्तभारत vs वेल्स शाम 4:30 बजे वेगनर हॉकी स्टेडियम17 अगस्तभारत vs इंग्लैंडशाम 6:30 बजे वेगनर हॉकी स्टेडियम19 अगस्तभारत vs पाकिस्तानशाम 6:30 बजे वेगनर हॉकी स्टेडियम
नोट: सभी समय भारतीय समयानुसार हैं.
यानी भारत का अभियान 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ शुरू होगा और सिर्फ चार दिन बाद 19 अगस्त को पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज मुकाबला होगा.
भारत के मैच कहां देख सकेंगे?
भारत में FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का टेलीकास्ट Star Sports पर किया जाएगा. इसके अलावा मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग JioHotstar पर उपलब्ध होगी. सलिए भारतीय दर्शक टीवी और डिजिटल दोनों माध्यमों से टीम इंडिया के मुकाबले देख सकेंगे.
क्या इस बार वर्ल्ड कप का फॉर्मेट बदला है?
FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में पिछली इवेंट की तरह सीधे क्रॉसओवर मुकाबले और क्वार्टर फाइनल नहीं होंगे. ग्रुप स्टेज के बाद हर पूल की शीर्ष दो टीमें दूसरे राउंड में जाएंगी. वहां आठ टीमों को दो ग्रुप में बांटा जाएगा.
पूल D की टॉप-2 टीमें पूल A की टॉप-2 टीमों के साथ दूसरे राउंड के ग्रुप में होंगी. इसी तरह पूल B की शीर्ष दो टीमें पूल C की टॉप दो टीमों के साथ खेलेंगी.
दूसरे राउंड में टीम अपने नए ग्रुप की दूसरी दोनों टीमों से मुकाबला करेगी. हालांकि पहले राउंड में उसी पूल से क्वालिफाई करने वाली टीम के खिलाफ हासिल किए गए अंक आगे भी साथ जाएंगे.
इसके बाद दोनों सेकेंड-राउंड ग्रुप की टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. पहले और दूसरे राउंड के ग्रुप में नीचे रहने वाली टीमों के लिए क्लासिफिकेशन मुकाबले भी होंगे.
भारत की टीम में अनुभव और युवा जोश का मेल
हेड कोच क्रेग फुल्टन ने इस वर्ल्ड कप के लिए लगभग उसी कोर ग्रुप पर भरोसा जताया है, जिसके साथ वह पिछले दो वर्षों से काम कर रहे हैं.हरमनप्रीत सिंह लगातार दूसरे वर्ल्ड कप में टीम की कप्तानी करेंगे. मंदीप सिंह और मनप्रीत सिंह चौथा वर्ल्ड कप खेलेंगे. वहीं टीम में कुछ खिलाड़ियों के लिए यह वर्ल्ड कप डेब्यू होगा.
भारत का पूरा स्क्वॉड
गोलकीपर:मोहित एचएस, सूरज करकरा, डिफेंडर्स: जरमनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच, मिडफील्डर्स: राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालगे, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, निलकांता शर्मा, विवेक सागर प्रसाद, फॉरवर्ड्स: दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह, अभिषेक,
मोहित एचएस, सूरज करकरा, यशदीप सिवाच, आदित्य अर्जुन लालगे, राजिंदर सिंह, जुगराज सिंह, संजय और शिलानंद लाकड़ा इस वर्ल्ड कप में डेब्यू करेंगे.
वर्ल्ड कप से पहले कैसी रहा भारत का फॉर्म?
वर्ल्ड कप में उतरते समय भारत की सबसे बड़ी चिंता उसकी हालिया फॉर्म है. भारत इस समय वर्ल्ड रैंकिंग में आठवें स्थान पर है. टीम का प्रो लीग सीजन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और वह अंक तालिका में दूसरे आखिरी स्थान पर रही. सीजन के शुरुआती आठ मुकाबलों में भारत को एक भी सीधी जीत नहीं मिली थी. हालांकि बाद के चरण में टीम ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया.
यूरोप में भारत ने नीदरलैंड्स, जर्मनी और पाकिस्तान जैसी टीमों को हराया. इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम ने शूटआउट में जीत हासिल की.
इन परिणामों की वजह से भारत FIH Nations League में रेलिगेशन से बच गया. रेलिगेशन का मतलब खेल प्रतियोगिताओं में किसी टीम का प्रदर्शन खराब होने के कारण नीचे की डिवीजन (लीग) में चले जाना है.
यही प्रदर्शन वर्ल्ड कप से पहले टीम को आत्मविश्वास देगा. खासकर नीदरलैंड्स, जर्मनी और इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबलों में भारतीय टीम ने अपने अटैक में सुधार दिखाया. हालांकि डिफेंस अब भी चिंता का विषय बना हुआ है.
भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
भारत के पास दुनिया के बेहतरीन ड्रैगफ्लिकर्स में शामिल हरमनप्रीत सिंह हैं. पेनल्टी कॉर्नर से गोल करने की उनकी क्षमता लंबे समय से भारत के लिए बड़ा हथियार रही है. बड़े मुकाबलों में हरमनप्रीत के ड्रैगफ्लिक मैच का रुख बदल सकते हैं.
हालांकि उनकी मौजूदा फॉर्म पर थोड़ी चिंता जरूर है. यूरोप में खेले गए प्रो लीग के पिछले आठ मुकाबलों में वह सिर्फ एक गोल कर सके.
इससे पहले उंगली की चोट के कारण वह सीजन के कुछ मुकाबलों से बाहर भी रहे थे. पिछले दो वर्षों में उन्हें कई चोटों का सामना करना पड़ा है. हालांकि अब वह पूरी तरह फिट नजर आ रहे हैं और पेरिस ओलंपिक की तरह एक बार फिर बड़ा प्रभाव डालने के लिए तैयार हैं.
अटैक में भी भारत के पास कई विकल्प
हरमनप्रीत के अलावा भारत के पास अटैक में अभिषेक, शिलानंद लाकड़ा और राजिंदर जैसे खिलाड़ी हैं. इन तीनों ने पिछले एक-दो साल में अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है. खासकर अभिषेक फील्ड गोल करने के मामले में भारत के प्रमुख हथियार बनकर उभरे हैं.
कोच फुल्टन की कोशिश होगी कि ये खिलाड़ी पूरे टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करें. अगर भारत के फॉरवर्ड्स मौकों को गोल में बदलने में कामयाब रहे तो टीम के खिताबी सफर को काफी मजबूती मिल सकती है.
डिफेंस है सबसे बड़ी चिंता
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती डिफेंस को लेकर है. पिछले दो प्रो लीग सीजन में भारतीय डिफेंस पहले के मुकाबले उतना मजबूत नजर नहीं आया. खास तौर पर सेट पीस और पेनल्टी कॉर्नर के खिलाफ बचाव में टीम को सुधार की जरूरत है.
गोलकीपिंग विभाग में भी बदलाव का असर दिखा है. दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश के संन्यास और कृष्ण पाठक की फॉर्म में गिरावट के बाद यह विभाग भारत के लिए चिंता का कारण बना.
फुल्टन की रणनीति मजबूत डिफेंस और तेज काउंटर अटैक पर आधारित है. लेकिन हाल के मुकाबलों में भारत कई बार अपनी इसी बुनियादी रणनीति पर पूरी तरह अमल नहीं कर पाया.
ऑफ-द-बॉल स्ट्रक्चर में भी समस्याएं नजर आई हैं. लगातार मुकाबलों के कारण थकान, अहम मौकों पर गलतियां और जरूरत से ज्यादा पेनल्टी कॉर्नर देना टीम के लिए नुकसानदेह रहा है.दूसरी तरफ भारत को अपने मिले मौकों को गोल में बदलने की क्षमता में भी सुधार करना होगा.
फुल्टन ने हालांकि भरोसा जताया है कि खिलाड़ियों ने पिछले मुकाबलों से सीख ली है और वर्ल्ड कप कैंप के दौरान इन कमजोरियों पर काम किया गया है.
भारत का हॉकी वर्ल्ड कप इतिहास
भारत ने हॉकी वर्ल्ड कप में तीन बार पोडियम फिनिश किया है. लेकिन तीनों बार की उपलब्धियां 1971 से 1975 के बीच आईं.
1971: ब्रॉन्ज मेडल
1973: सिल्वर मेडल
1975: गोल्ड मेडल
इसके बाद भारत कभी टॉप-4 में भी जगह नहीं बना सका
1975 के बाद बीते 51 वर्षों में भारतीय हॉकी टीम के लिए यह सबसे बड़ा इंतजार रहा है. इस बार टीम के सामने सिर्फ वर्ल्ड कप जीतने की चुनौती नहीं, बल्कि उस पुराने गौरव को वापस हासिल करने का मौका भी है. भारत ने पिछले दो वर्ल्ड कप की मेजबानी भी की थी. 2018 में ओडिशा में खेले गए टूर्नामेंट में भारत को क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड्स ने बाहर कर दिया था.
2023 के पिछले संस्करण में भी भारत अपने घरेलू मैदान पर आगे नहीं बढ़ सका. न्यूजीलैंड के खिलाफ क्रॉसओवर मुकाबले में टीम को पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा.
अब 2026 में फॉर्मेट भी बदल चुका है और टीम का लक्ष्य भी साफ है, पहले ग्रुप स्टेज पार करना, फिर दूसरे राउंड में जगह बनाना और आखिरकार 51 साल पुराने इंतजार को खत्म करते हुए वर्ल्ड कप ट्रॉफी भारत लाना.

