डेस्क: बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham) में दान और चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी के मामले में जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान हिमाचल प्रदेश निवासी मनोज कुमार के रूप में हुई है। वह लामबगड़ में जयप्रकाश (JP) कंपनी के लिए काम करता था।
यह JP कंपनी से जुड़े किसी आरोपी की इस मामले में तीसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले भी कंपनी से जुड़े दो लोगों को जांच के सिलसिले में गिरफ्तार किया जा चुका है। SIT की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की जांच जारी है।
2 जुलाई को सामने आया था मामला
बद्रीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का मामला 2 जुलाई से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार मनोज कुमार बद्रीनाथ में JP कंपनी की ओर से अलकनंदा नदी के जलस्तर की निगरानी का काम करता था।
बताया गया है कि कंपनी की ओर से वह मंदिर परिसर में भी मौजूद रहता था। उसके मंदिर में मौजूद रहने को निःशुल्क सेवा से भी जोड़ा गया है। SIT अब उसकी भूमिका और चढ़ावे की रकम से जुड़े घटनाक्रम में उसकी कथित संलिप्तता की जांच कर रही है।
सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद जांच के आदेश
चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी से जुड़ा मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने जांच के आदेश दिए थे। समिति की ओर से कहा गया था कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मामले की शिकायत हिंदूवादी संगठन भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने की थी। उन्होंने BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ को शिकायत पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की थी।
पहले भी हुई थी पूछताछ
मामला सामने आने के बाद SIT ने जांच शुरू की और JP कंपनी के एक कर्मचारी समेत BKTC के एक पूर्व कर्मचारी से भी पूछताछ की थी।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि JP कंपनी का कर्मचारी हिमाचल प्रदेश का रहने वाला था और बद्रीनाथ में कंपनी की ओर से अलकनंदा नदी के जलस्तर की निगरानी करता था। बताया गया कि वह निःशुल्क सेवा के नाम पर मंदिर में भी मौजूद रहता था।
जांच अभी जारी
मनोज कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामले में JP कंपनी से जुड़े गिरफ्तार आरोपियों की संख्या तीन हो गई है। हालांकि, SIT अभी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी कैसे हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
फिलहाल जांच एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है।

