डेस्कः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापार नीति एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन के खिलाफ न्यूयॉर्क स्थित ‘यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में एक मुकदमा दायर किया है। यह याचिका भारत सहित दुनिया के 60 व्यापारिक भागीदारों पर लगाए गए नए आयात शुल्कों (टैरिफ) को रोकने के लिए दायर की गई है।
भारत पर टैरिफ में मामूली राहत
ताजा शुल्कों के तहत भारत पर भी प्रभाव पड़ा है। हालांकि, प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रवर्तन उपायों को मजबूत करने के बाद भारत के लिए टैरिफ दर को 12.5 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। 24 जुलाई को घोषित ये शुल्क यूरोपीय संघ सहित कई अन्य प्रमुख व्यापारिक देशों पर भी लागू होते हैं।
राज्यों का तर्क: अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं ट्रंप
न्यूयॉर्क और ओरेगन सहित 25 राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन अपनी कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है। राज्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल कर रहा है ताकि उन शुल्कों को फिर से लागू किया जा सके जिन्हें अदालतें पहले ही अवैध घोषित कर चुकी हैं। ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और स्थानीय व्यवसायों पर अराजकता थोपने की कोशिश कर रहे हैं”।
प्रशासन का बचाव
दूसरी ओर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने इन शुल्कों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में जबरन श्रम से बने सामानों पर आयात प्रतिबंध लगभग एक सदी से लागू है और अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक भागीदार भी ऐसा ही करें।
पुरानी रणनीति, नया कानूनी दांव
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के टैरिफ अदालतों में पहुंचे हैं। इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ प्रयासों को अवैध करार दिया था। अदालती झटकों के बाद, ट्रंप प्रशासन ने इस बार ‘व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301’ का सहारा लिया है, जिसका उपयोग ऐतिहासिक रूप से विशिष्ट देशों की अनुचित व्यापार प्रथाओं को लक्षित करने के लिए किया जाता रहा है।
इन उत्पादों को मिली छूट
भले ही 60 देशों पर गाज गिरी है, लेकिन तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौते (USMCA) के तहत आने वाले कुछ उत्पादों को इन नए शुल्कों से फिलहाल छूट दी गई है। अब सबकी नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि ट्रंप की यह ‘टैरिफ रणनीति’ टिक पाएगी या एक बार फिर उन्हें कानूनी शिकस्त का सामना करना पड़ेगा।

