राष्ट्रीय

कावेरी विवाद पर फिर बढ़ा सियासी घमासान, विजय सरकार के मंत्री का डीके शिवकुमार पर बड़ा हमला

डेस्क: कावेरी जल विवाद (Kaveri Water Dispute) को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक (Tamil Nadu – Karnataka) के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित बातचीत टलने के बाद तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ मंत्री आर. निर्मल कुमार (Tamil Nadu – Karnataka) ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार अपनी पार्टी के नेतृत्व से अधिक डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन के प्रभाव में काम करते हैं।
निर्मल कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि डीके शिवकुमार कांग्रेस नेतृत्व की सलाह से ज्यादा स्टालिन और उनके परिवार की बातों को महत्व देते हैं। उनके इस बयान ने कावेरी विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।

बातचीत की कोशिश के बाद बदला रुख
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक नेतृत्व से सीधे संवाद की पहल की थी। हालांकि बाद में प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से आए ताजा बयान को बातचीत की रणनीति से पीछे हटने और अधिक आक्रामक राजनीतिक रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अब कावेरी विवाद के समाधान के लिए अदालत और संबंधित न्यायाधिकरणों की प्रक्रिया पर ही अधिक जोर दिया जा सकता है।
विपक्षी दलों पर भी साधा निशाना
आर. निर्मल कुमार ने तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके की भी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि डीएमके ने अपने शासनकाल के दौरान कावेरी विवाद को लेकर प्रभावी कानूनी पहल क्यों नहीं की।
उन्होंने एआईएडीएमके पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि पार्टी विधानसभा में पारित प्रस्तावों का समर्थन करती है, तो बाद में अदालत में अलग रुख अपनाने का औचित्य क्या है।
क्या बातचीत नहीं चाहता कर्नाटक?
तमिलनाडु सरकार के मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक की ओर से ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कावेरी और मेकेदातू परियोजना पर क्यों है विवाद?
कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कई वर्षों से विवाद चला आ रहा है। दोनों राज्यों के लिए पानी की मात्रा न्यायाधिकरण और न्यायालय के आदेशों के अनुसार निर्धारित है। लेकिन कम वर्षा और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण हर वर्ष मानसून के दौरान विवाद गहरा जाता है।
विवाद का दूसरा प्रमुख कारण कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातू बांध परियोजना है। कर्नाटक का कहना है कि इस परियोजना से बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों के लिए पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
वहीं तमिलनाडु का तर्क है कि यदि यह बांध बनता है तो कावेरी के निचले हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे राज्य के डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई और किसानों की आजीविका पर असर पड़ेगा। इसी वजह से तमिलनाडु लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करता रहा है।
कावेरी जल विवाद और मेकेदातू परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच कानूनी और राजनीतिक संघर्ष अभी भी जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *