16 से 22 सितंबर के बीच विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित शिविर में दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर के 200 स्वयंसेवकों की है भागीदारी
दरभंगा:ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग द्वारा बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पटना के सौजन्य से विश्वविद्यालय परिसर स्थित जुबिली हॉल में संचालित चौथे एवं अंतिम शिविर दूसरे दिन भी जारी रहा, जिसमें दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर के विभिन्न कॉलेजों के 200 एनएसएस स्वयंसेवकों भाग ले रहे हैं। शिविर में संयोजक डॉ आर एन चौरसिया, कार्यक्रम पदाधिकारी- डॉ सोनू राम शंकर, डॉ अनुपम प्रिया, डॉ प्रेम कुमारी, डॉ लक्ष्मी कुमारी, डॉ कमलेश्वर प्रसाद कमल, डॉ दिलीप झा, भू-संपदा पदाधिकारी डॉ कामेश्वर पासवान, मुकेश कुमार झा, मणिकांत ठाकुर, अंकिता, सौरभ झा, सुमित, संजय, नागेन्द्र साह, एसडीआरएफ प्रशिक्षकों में रूपेश कुमार पासवान, पंकज कुमार, राजू कुमार, hसंतोष कुमार, पूजा कुमारी, प्रीति कुमारी, प्रभु कुमार, सच्चिदानन्द एवं मिथिलेश के साथ ही सदर अस्पताल, दरभंगा से गजेन्द्र गोलिया, प्रतिभा रानी, पिंकी कुमारी, चन्दा कुमारी भारती, पवन यादव, श्याम पासवान, बिहार पुलिस के जवान एवं अग्निशमन दल के सदस्य एवं आयोजन समिति के सदस्यों के अलावे 200 स्वयंसेवक उपस्थित थे।
आज के शिविर का प्रारंभ राष्ट्रगान एवं एनएसएस लक्ष्य गीत से, जबकि समापन राष्ट्रगान से हुआ। शिविर का शुभारंभ करते हुए पीजी विभागों के एनएसएस पदाधिकारी डॉ सोनू राम शंकर ने कहा कि आपदा प्रशिक्षण हमें समाज सेवा करने का बेहतरीन कौशल प्रदान करता है। इससे युवा- स्वयंसेवकों के अन्दर आत्मविश्वास एवं आत्मगौरव की भावना का संचार होता है। कहा कि यह युवाओं में राष्ट्र की सुरक्षा, समाज की सेवा तथा पीड़ित मानवता की रक्षा के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम है। ये सामाजिक जिम्मेदारी युक्त युवा जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र आदि की सीमाएं मिटाकर समाज का मार्गदर्शन एवं नेतृत्वकर्ता बनेंगे। ये प्रशिक्षित स्वयंसेवक हमारे क्षेत्र के लिए अमूल्य योगदान कर सकते हैं।
मुख्य प्रशिक्षक रूपेश कुमार पासवान ने बाढ़-प्रबंधन पर बोलते हुए कहा कि बिहार भारत का सबसे बाढ़ग्रस्त राज्यों में एक है, जहां 76% लोग बाढ़ प्रभावित हैं। इसके 38 जिलों में से 28 जिले बाढ़ प्रभावित हैं। उनमें भी 12 जिले सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित हैं। कहा कि बिहार में बाढ़ एक वार्षिक एवं जटिल समस्या है, जिसके प्रभाव को उचित योजना, उच्च तकनीक, दीर्घकालिक निवेश, अंतर राज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग से कम किया जा सकता है। उन्होंने बाढ़ के कारण एवं दुष्प्रभावों को बताते हुए बाढ़ से बचाव हेतु तैरने वाले घरेलू रफ्ट (नाव)- चारपाई, ट्यूब, मटका, बम्बू, ड्रम, वाटर बोतल, केला थम, थर्मोकोल आदि से बनाने की विस्तार से चर्चा की। वहीं बाढ़ के दौरान आपातकालीन किट में रखे जाने वाले उपयोगी सामानों की जानकारी एवं उपयोगिता बताया। अगले सत्र में व्यक्ति के पानी में डूबने के कारण तथा डूबते हुए व्यक्ति को बचाने के विभिन्न तरीकों की जानकारी व्यावहारिक रूप में दी गई। साथ ही डूबे हुए व्यक्ति के पेट से पानी निकालने के विभिन्न तरीके भी बताएं।
प्रशिक्षक राजू कुमार ने ‘मेडिकल फास्ट रिस्पांडर’ को विस्तार से बताते हुए विभिन्न प्रकार की पट्टियों एवं उनको लगाने के तरीकों के साथ लाभों को रेखांकित किया। बांस एवं लकड़ी पटरा आदि से खपची बांधना सिखाया। वहीं उन्होंने शरीर के स्वस्थ या अस्वस्थ होने के पहचान हेतु विभिन्न उपकरणों- थर्मामीटर, स्थेसोस्कोप, बीपी मापक यंत्र, सीपीआर मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर, कलम रोशनी, फेस शिल्ड मास्क आदि अनेक के स्वरूप एवं उनके महत्वों को रेखांकित किया। अगले सत्र में प्रशिक्षिका प्रीति कुमारी में रोगी के ‘शरीर का परीक्षण क्यों और कैसे’ को बताते हुए कहा कि यह रोगी के शरीर का परीक्षण प्राथमिक उपचार एवं चिकित्सा व्यवस्था का अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। शरीर परीक्षण से रोगी के शरीर में मौजूद चोट, रक्तस्राव, सूजन, जलन, हड्डी टूटने, बेहोशी आदि का पता चलता है। तभी डॉक्टरों द्वारा सही एवं समय पर इलाज संभव हो सकता है और रोगी जल्द स्वस्थ हो सकते हैं। तदोपप्रांत प्रशिक्षक पंकज कुमार ने क्राइसिस मैनेजमेंट को विस्तार से बताया।


