डेस्क: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन (Jantar Mantar Protest) और उससे जुड़ी हिंसा की जांच अब सोशल मीडिया नेटवर्क (Social media network) और डिजिटल प्रचार अभियान तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियां प्रदर्शन के समर्थन में ऑनलाइन अभियान चलाने वाले कई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स, यूट्यूबर्स (Influencers, YouTubers) और डिजिटल मार्केटिंग से जुड़ी कंपनियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही कुछ पूर्व पत्रकारों की गतिविधियां भी जांच के दायरे में बताई जा रही हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रदर्शन के समर्थन में सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियान के पीछे किस तरह का समन्वय था और इसके लिए वित्तीय लेनदेन कैसे किए गए। डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
प्रति पोस्ट भुगतान के आरोपों की जांच
सूत्रों के मुताबिक, इंस्टाग्राम, एक्स और यूट्यूब पर सक्रिय कुछ लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स को कथित तौर पर प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट साझा करने के लिए भुगतान किए जाने की आशंका है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया प्रबंधन से जुड़ी तीन कंपनियों के माध्यम से इन भुगतानों का संचालन किया गया था। फिलहाल एजेंसियां इन दावों की पुष्टि के लिए दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।
स्पेशल सेल को सौंपी गई जांच
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के निर्देश पर पूरे मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंप दी गई है। 20 जुलाई को हुई हिंसा से जुड़े मामलों में संसद मार्ग थाने में 21 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
एफआईआर में दंगा, आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास, पुलिसकर्मियों पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा और हथियार छीनने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप शामिल किए गए हैं।
एफआईआर में सुनियोजित साजिश का दावा
पुलिस की एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ को उकसाया गया, जिसके बाद स्थिति हिंसक हो गई। एफआईआर के अनुसार, संसद मार्च के आह्वान के बाद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंचे थे और भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों को सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने के लिए उकसाया।
पुलिस का आरोप है कि इसके बाद पथराव हुआ, जिसमें कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि एक हवलदार पर हमला कर उसका हथियार छीनने का आरोप लगाया गया, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों के हथियार छीनने की भी कथित कोशिश की गई।
जांच अभी जारी
फिलहाल जांच एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों, डिजिटल प्रचार, वित्तीय लेनदेन और हिंसा के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। मामले में अब तक लगाए गए सभी आरोप पुलिस जांच का हिस्सा हैं और इनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा आगे की जांच के बाद ही होगी।

