डेस्क: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने ही पूर्व आदेश में हुई तथ्यात्मक गलती को सुधारते हुए मेवात के पुलिस अधीक्षक (एस.पी.) पर लगाया गया 5 हजार रुपए का जुर्माना वापस ले लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि न्यायालय की अपनी गलती से किसी पक्ष को नुकसान होता है तो उस नुकसान का भार संबंधित व्यक्ति पर नहीं डाला जा सकता। अदालत ने 18 अगस्त 2026 के आदेश में राज्य के वकील को अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने और उसकी अग्रिम प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को देने का निर्देश दिया था। ऐसा नहीं होने पर मेवात के एस.पी. पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाने की चेतावनी दी गई थी।
7 सितम्बर को जब जवाब दाखिल नहीं होने की स्थिति कोर्ट के समक्ष दर्ज हुई तो राज्य की ओर से देरी से जवाब रिकार्ड पर लेने का अनुरोध किया गया। कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार नहीं किया और जुर्माना लगा दिया। साथ ही एस.पी. पर 5 हजार रुपए का अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) को यह राशि एस.पी. के वेतन से काट कर हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करवाने का निर्देश दिया गया।
बाद में कोर्ट के कर्मचारियों ने इस तथ्य की ओर ध्यान दिलाया कि 7 सितम्बर को राज्य ने जवाब रिकार्ड पर रखने का प्रयास किया था। यानी कोर्ट के आदेश में यह तथ्य सही तरीके से दर्ज नहीं हो पाया था। इसी तथ्यात्मक गलती के आधार पर एस. पी. पर जुर्माना लगाया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि जब सही तथ्य कोर्ट के संज्ञान में आते हैं और यह स्पष्ट हो जाता है कि कार्रवाई कोर्ट की अपनी अनजाने में हुई गलती के कारण हुई, तो उस गलती को सुधारना न्याय का अनिवार्य हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि जहां कोर्ट की गलती से किसी पक्ष को नुकसान पहुंचा हो, वहां कोर्ट को संबंधित पक्ष को उसी स्थिति में वापस लाना चाहिए, जिसमें वह गलती नहीं होने पर होता।

