डेस्क: 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल दिल्ली पुलिसकर्मियों (Delhi Police personnel) के परिवार अब खुलकर सामने आए हैं। शुक्रवार को चार पुलिसकर्मियों (Police personnel) के परिजनों ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता कर घटना पर अपनी पीड़ा व्यक्त की और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि इस हिंसा में पुलिसकर्मी भी पीड़ित हैं और उनके परिवारों को भी न्याय मिलना चाहिए।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में परिजनों ने दावा किया कि हिंसा के दौरान 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने घटना से जुड़ी तस्वीरें भी साझा करते हुए कहा कि ड्यूटी निभाते समय पुलिसकर्मियों को गंभीर हमलों का सामना करना पड़ा।
सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान का दावा
परिजनों ने आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान बड़ी मात्रा में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। उनके अनुसार, 110 से अधिक बैरिकेड, करीब 350 हेलमेट, 300 बॉडी प्रोटेक्टर, 20 लाउडहेलर, 10 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर, एक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, 25 से अधिक सरकारी वाहन तथा अन्य सार्वजनिक और निजी संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुईं।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात थे और उनके परिवारों के दर्द को भी समझा जाना चाहिए।
दिल्ली पुलिस महासंघ ने की निष्पक्ष जांच की मांग
दिल्ली पुलिस महासंघ ने भी पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। महासंघ की ओर से पूर्व एसीपी के.पी. कुकरेती ने कहा कि यदि स्थिति और अधिक बिगड़ जाती तथा संसद, सांसदों या सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा होता, तो कानून के तहत बल प्रयोग की नौबत भी आ सकती थी।
घायल एक एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने बताया कि जब उनके पति घायल अवस्था में घर लौटे तो पूरा परिवार भावुक हो गया। उन्होंने कहा कि खून से सनी वर्दी देखकर उनकी दो वर्षीय बेटी डर गई। उनके अनुसार, हर पुलिसकर्मी के पीछे एक पूरा परिवार होता है, जो हर दिन उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता में जीता है।
वहीं, घायल एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि 20 जुलाई की सुबह उनके पति ने फोन कर बताया था कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है और वे संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। शाम को जब दोबारा संपर्क हुआ तो पता चला कि वे अस्पताल में भर्ती हैं और हमले में उनका हेलमेट भी टूट गया था।
“छात्र नहीं, उपद्रवी जिम्मेदार”
प्रेस वार्ता में परिजनों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी छात्र या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी को दोषी ठहराना नहीं है। उनका आरोप है कि भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा भड़काई, जिसके कारण बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए।
केरल सरकार ने वापस लिए प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले
इधर, केरल सरकार ने पेपर लीक के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया है। सरकार के अनुसार, इन मामलों में अब आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
फिलहाल, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच जारी है और पुलिस विभिन्न मामलों में साक्ष्यों तथा घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।

