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मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत में क्यों नहीं बढ़े PNG के दाम? सरकार ने बताया कारण

डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद भारत में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमतों में बड़ा इजाफा नहीं हुआ। सरकार का कहना है कि समय पर उठाए गए कदमों और गैस आवंटन की विशेष व्यवस्था की वजह से आम लोगों को महंगाई का झटका नहीं लगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने संसद में बताया कि घरेलू PNG के लिए मिलने वाली गैस की कीमत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 7 डॉलर प्रति MMBtu की सीमा में रखी गई है। इसके अलावा सरकार ने शहरों में PNG की बढ़ती मांग को देखते हुए पिछले तिमाही की वास्तविक खपत के मुकाबले 105 प्रतिशत तक घरेलू गैस आवंटित की। इससे गैस की उपलब्धता बनी रही और कीमतों पर दबाव कम हुआ।

सरकार ने बताया कि प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 के तहत घरेलू PNG को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रखा गया था। इसके साथ ही CNG, LPG उत्पादन और उर्वरक उद्योग को भी प्राथमिकता दी गई, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों। बाद में जब गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य हुई तो इस व्यवस्था को वापस ले लिया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि PNG की कीमत सभी शहरों में समान नहीं होती। इसकी वजह गैस खरीदने की लागत, पाइपलाइन से परिवहन खर्च, राज्य सरकारों के टैक्स, सब्सिडी और गैस वितरण कंपनियों का खर्च है। इसलिए कुछ जगह PNG, LPG से सस्ती हो सकती है, जबकि कुछ शहरों में इसका अंतर कम या ज्यादा हो सकता है।
सरकार देशभर में PNG नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। अब तक 309 भौगोलिक क्षेत्रों के 683 जिलों में सिटी गैस नेटवर्क विकसित करने की अनुमति दी जा चुकी है। 31 मई 2026 तक देश में 1.70 करोड़ से अधिक घरेलू PNG कनेक्शन दिए जा चुके हैं और 6.71 लाख इंच-किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है।
सरकार ने नेशनल पीएनजी ड्राइव 2.0 के तहत डिजिटल रजिस्ट्रेशन, आसान कनेक्शन प्रक्रिया और जागरूकता अभियान शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा घरों तक PNG पहुंचाना है।

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