बिहार

बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा-राजद के बीच सीधी लड़ाई, जनसुराज मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में

डेस्क:पटना । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब पूरी तरह राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। चुनाव प्रचार ने रफ्तार पकड़ ली है और भाजपा, राजद तथा जन सुराज ने पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि चुनावी मैदान में तीन प्रमुख दल मौजूद हैं, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और चुनावी गतिविधियों को देखते हुए मुकाबला फिलहाल भाजपा और राजद के बीच सीधा माना जा रहा है। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर इस चुनाव को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में जुटे हैं। भाजपा ने अपने प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के समर्थन में चुनाव प्रचार को बूथ स्तर तक पहुंचा दिया है। पार्टी के 40 स्टार प्रचारक लगातार जनसभाएं और घर-घर संपर्क अभियान चला रहे हैं। भाजपा का दावा है कि संगठन की मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के व्यापक नेटवर्क के कारण उसे चुनाव में स्पष्ट बढ़त हासिल है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि बांकीपुर में पार्टी की जीत तय है। उन्होंने दावा किया कि राजद और जन सुराज दूसरे स्थान के लिए संघर्ष कर रहे हैं और भाजपा का किसी से सीधा मुकाबला नहीं है। दूसरी ओर, राजद भी इस चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ रहा है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अभी तक चुनाव प्रचार में नहीं उतरे हैं लेकिन पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता लगातार भाजपा पर हमलावर हैं। राजद के प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि बांकीपुर में बदलाव का माहौल है और उनकी पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता जीत दर्ज करेंगी।
उन्होंने कहा, “भ्रम में मत रहिए। अभी तो राष्ट्रीय जनता दल ने सिर्फ मंदिर की घंटी बजाई है और पूरी एनडीए बेचैन हो गई है। भाजपा ने राजद प्रत्याशी के डर से अपना उम्मीदवार तक बदल दिया। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में जनता इस बार बेहतर जनप्रतिनिधि चुनेगी। बांकीपुर का दलित, पिछड़ा, मुस्लिम और अन्य वंचित वर्ग भाजपा को नकारकर राजद प्रत्याशी को जिताएगा।”
इधर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार चुनाव प्रचार में सक्रिय हैं। उनकी सभाओं और सोशल मीडिया अभियान की काफी चर्चा हो रही है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत संगठन का अभाव है। कई इलाकों में पार्टी का बूथ स्तर का ढांचा भाजपा और राजद की तुलना में कमजोर नजर आ रहा है। स्थानीय मतदाताओं से बातचीत में भी यही संकेत मिल रहे हैं कि मुख्य मुकाबला भाजपा और राजद के बीच है।
हालांकि प्रशांत किशोर लगातार मतदाताओं के बीच पहुंचकर इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जन सुराज को अपेक्षा से अधिक वोट मिलते हैं तो उसका सीधा असर भाजपा या राजद में से किसी एक के वोट बैंक पर पड़ सकता है, जिससे मुकाबला और रोचक हो सकता है। फिलहाल भाजपा संगठनात्मक मजबूती और सत्ता पक्ष की रणनीति के सहारे बढ़त बनाए रखने का दावा कर रही है, जबकि राजद अपने पारंपरिक सामाजिक समीकरण और स्थानीय जनाधार के भरोसे चुनावी मैदान में डटा है।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर अपनी सक्रिय चुनावी मुहिम के दम पर इस मुकाबले को कितना त्रिकोणीय बना पाते हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि तीन अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। आने वाले दिनों में प्रमुख नेताओं के प्रचार अभियान से चुनावी मुकाबला और तेज होने की संभावना है।

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