डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति (US President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने साफ कह दिया है कि इजरायली प्रधानमंत्री (Israeli PM) बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को अमेरिका में किसी भी हाल में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू ईरान के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिसने हाल ही में 52 हजार बेगुनाह प्रदर्शनकारियों को मार डाला. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान पिछले 47 सालों से अमेरिकी सैनिकों और दूसरे लोगों की हत्या करता आ रहा है.
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अगर किसी को गिरफ्तार करना है तो वह ईरान के उन नेताओं को होना चाहिए, जिन्होंने देश को तबाही और मौत के इस सिलसिले में धकेला. उन्होंने इसे ‘मौत और बर्बादी का सिलसिला’ बताया और कहा कि इस मसले को पहले ही सुलझा लिया जाना चाहिए था. ट्रंप ने इसके लिए पिछले अमेरिकी राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्होंने समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया.
गौरतलब है कि नेतन्याहू पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों में घिरे रहे हैं. ऐसे में जब अमेरिका जैसे बड़े देश का राष्ट्रपति खुद उनके समर्थन में इस तरह खुलकर बयान देता है, तो इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका और इजरायल के बीच की दोस्ती अब भी उतनी ही मजबूत बनी हुई है. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव चल रहा है.
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान पर सीधा आरोप लगाया कि उसने प्रदर्शन कर रहे बेगुनाह लोगों की जान ली. उन्होंने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह किसी भी सूरत में माफी लायक नहीं है. उनके मुताबिक, जो लोग इस हिंसा और मौत के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हीं पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि नेतन्याहू पर, जो खुद ईरान के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में साफ तौर पर यह संदेश दिया कि अमेरिका, नेतन्याहू के साथ पूरी तरह खड़ा है और किसी भी तरह की गिरफ्तारी की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने इस पूरे मामले को अमेरिका की विदेश नीति से जोड़ते हुए कहा कि पिछली सरकारों की कमजोरी की वजह से ही यह संकट इतना बड़ा हो गया.
ट्रंप का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. कुछ लोग इसे ट्रंप का इजरायल के प्रति खुला समर्थन बता रहे हैं, तो कुछ इसे ईरान के खिलाफ अमेरिका की सख्त नीति का संकेत मान रहे हैं. फिलहाल इस बयान पर ईरान या नेतन्याहू की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

