डेस्क: लेबर पार्टी (Labour Party) के सांसद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री (Britain’s 59th Prime Minister) बन गए हैं। बकिंघम पैलेस (Buckingham Palace) में किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) के साथ एक निजी मुलाकात के दौरान उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया गया। इससे पहले सर कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा सम्राट को सौंप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
बकिंघम पैलेस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सर कीर स्टार्मर ने आज सुबह सम्राट से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे महामहिम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे खास बात है एंडी बर्नहैम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ता। बर्नहैम, ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वह ट्रंप के साथ कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
चुनौती होंगे ट्रंप के साथ संबंध
बर्नहैम के सामने शुरुआती विदेश नीति की चुनौतियों में से एक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को संभालना होगा। बर्नहैम के पद संभालने से पहले ट्रंप ने उन्हें बेहद उदारवादी बताया था। बर्नहैम अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीति को ब्रिटेन में लाने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि उनकी इस आलोचना से अमेरिका के साथ ब्रिटेन के पुराने और मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है।
हर तरफ से दबाव
घरेलू मोर्चे पर, बर्नहैम को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जिसे हर तरफ से राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आगमन वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता के बीच हुआ है, जिस दौरान बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर एक के बाद एक सत्ता में आए। ऐसे में श्री बर्नहैम के सामने न केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की भी ज़िम्मेदारी है कि उनकी सरकार वह स्थिरता प्रदान करेगी जो उनके कई पूर्ववर्तियों के समय नहीं दिख सकी।
ब्रिटेन को बड़े बदलाव की जरूरत
ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रहे बर्नहैम को ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ (उत्तर का राजा) के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी लेबर पार्टी की सरकारों में काम कर चुके हैं। बर्नहैम लंबे समय से लंदन से बाहर के क्षेत्रों में अधिक निवेश और प्रशासनिक शक्तियां देने की वकालत करते रहे हैं। उम्मीद है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में इस बात पर जोर देंगे कि ब्रिटेन को एक बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने, संघर्ष कर रहे सार्वजनिक क्षेत्रों में सुधार करने और ‘ब्रिटेन को फिर से सुदृढ़ करने’ की योजनाएं शामिल हैं।
यह भी एक रिकॉर्ड
स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में जीवित पूर्व प्रधानमंत्रियों की संख्या रिकॉर्ड नौ हो गई है। इनमें जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गॉर्डन ब्राउन, डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर शामिल हैं। उम्मीद है कि ये सभी नेता इस साल लंदन के सेनोटैफ में आयोजित होने वाली ‘रिमेंब्रेंस संडे’ सेवा में एक साथ नजर आएंगे।

